जापान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र फिर से शुरू होने के बाद रेडियोधर्मी कचरे के निपटान की समस्या खड़ी हुई

जापान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र फिर से शुरू होने के बाद रेडियोधर्मी कचरे के निपटान की समस्या खड़ी हुई

जापान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र फिर से शुरू होने के बाद रेडियोधर्मी कचरे के निपटान की समस्या खड़ी हुई
Modified Date: June 11, 2026 / 09:35 am IST
Published Date: June 11, 2026 9:35 am IST

काशीवाजाकी (जापान), 11 जून (एपी) वैश्विक तेल संकट के बीच बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए जापान ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र का संचालन फिर से शुरू कर दिया है, लेकिन इस कदम से एक गंभीर समस्या भी खड़ी हो गई है। इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के निस्तारण के लिए जगह तेजी से कम पड़ रही है और रेडियोधर्मी कचरे के स्थायी निपटान की कोई व्यवहारिक योजना फिलहाल उसके पास मौजूद नहीं है।

इस वर्ष की शुरुआत में काशीवाजाकी-कारीवा परमाणु ऊर्जा केंद्र के नंबर-6 रिएक्टर को दोबारा चालू किया गया था। इसका उद्देश्य अन्य परमाणु रिएक्टरों को भी फिर से शुरू करने की प्रक्रिया को गति देना था। जापान की विद्युत ऊर्जा कंपनियों के महासंघ के अनुसार, काशीवाजाकी-कारीवा उन तीन संयंत्रों में शामिल है जिनके शीतलन कुंड (कूलिंग पूल) अगले पांच वर्षों में पूरी तरह भर जाएंगे।

काशीवाजाकी-कारीवा के महाप्रबंधक ताकेयुकी इनागाकी ने कहा, ‘‘ईंधन प्रबंधन की ठोस योजना के बिना हमारी बिजली उत्पादन व्यवस्था देर-सबेर ठप पड़ जाएगी।’’

इस्तेमाल हो चुके उच्च स्तर के रेडियोधर्मी परमाणु ईंधन (स्पेंट फ्यूल) के स्थायी भंडारण की दशकों पुरानी तलाश के बीच सरकार अब तोक्यो के दक्षिण में प्रशांत महासागर में स्थित दूरस्थ द्वीप मिनामितोरिशिमा पर विचार कर रही है। हालांकि, ‘स्पेंट फ्यूल’ और रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन को लेकर सरकार की नीतियों और निर्णयों पर उठे सवालों के कारण इस प्रस्ताव को लेकर संदेह और आलोचना भी सामने आई है।

मार्च 2011 के फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद से जापान के 54 रिएक्टर में से केवल 15 को ही दोबारा शुरू किया जा सका है। उस समय पूर्वोत्तर जापान के तट के पास आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी से तोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेपको) के तीन रिएक्टर में ईंधन कोर पिघल गए थे। इस हादसे के कारण लगभग 1.60 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और कुछ क्षेत्र आज भी रहने योग्य नहीं हैं।

टेपको द्वारा संचालित काशीवाजाकी-कारीवा संयंत्र को भी फुकुशिमा हादसे के बाद देशव्यापी परमाणु संयंत्र बंदी के तहत बंद कर दिया गया था।

काशीवाजाकी-कारीवा के नंबर-6 रिएक्टर का कूलिंग पूल (शीतलन कुंड) 88 प्रतिशत तक भर चुका है और उसमें रखा ‘स्पेंट फ्यूल’ संयंत्र के शीर्ष तल पर बने अवलोकन क्षेत्र से देखा जा सकता है। फुकुशिमा हादसे से सबक लेते हुए टेपको ने यहां फ़िल्टर्ड वेंटिंग सिस्टम और हाइड्रोजन विस्फोट रोकने वाले उपकरण समेत कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए हैं।

जापान के प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची अधिक परमाणु संयंत्रों को चालू करने पर जोर दे रही हैं, जिससे ‘स्पेंट फ्यूल’ की मात्रा और बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थायी भंडारण की व्यवहारिक योजना नहीं बनी तो भंडारण क्षमता समाप्त होने पर रिएक्टर को फिर से बंद करना पड़ सकता है।

इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के निपटान के दो विकल्प हैं। पहला इसका सीधे कचरे के रूप में निस्तारण किया जाए या इसमें से प्लूटोनियम और यूरेनियम निकालकर पुनः उपयोग किया जाए।

जापान पुनर्चक्रण की नीति पर जोर देता है। उसका कहना है कि इससे संसाधनों की कमी वाले देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और रेडियोधर्मी कचरे की विषाक्तता तथा मात्रा भी घटेगी। हालांकि, प्लूटोनियम के पुनः उपयोग के लिए बनाया गया विशेष रिएक्टर विफल रहा है। साथ ही पुनर्प्रसंस्करण (रीप्रोसेसिंग) सभी ‘स्पेंट फ्यूल’ को संभालने में सक्षम नहीं होगा, जिससे प्लूटोनियम का भंडार और बढ़ सकता है। वर्तमान भंडार पहले ही हजारों परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जापान को प्रत्यक्ष निपटान के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 तक जापान के 17 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के ‘कूलिंग पूल’ में 17,000 टन से अधिक ‘स्पेंट फ्यूल’ जमा था, जो कुल भंडारण क्षमता का लगभग 80 प्रतिशत है।

फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद 14 वर्षों में पहली बार काशीवाजाकी-कारीवा के नंबर-6 रिएक्टर के दोबारा चालू होने के कुछ सप्ताह बाद, उद्योग मंत्री रयोसेई अकाजावा ने ओगासावारा प्रशासन से संपर्क करके मिनामितोरिशिमा द्वीप पर उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी कचरा निपटान स्थल की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने का अनुरोध किया। मिनामितोरिशिमा ओगासावारा के प्रशासनिक नियंत्रण वाला द्वीप है, जो तोक्यो का हिस्सा है।

सरकार के स्वामित्व वाला मिनामितोरिशिमा द्वीप तोक्यो से लगभग 2,000 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और वहां कोई स्थायी निवासी नहीं है।

एपी अमित वैभव

वैभव


लेखक के बारे में