चीन में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका घटी
चीन में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका घटी
बीजिंग, नौ अगस्त (भाषा) चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को लंबे समय से अपनी उपलब्धियों में से एक बताती रही है। हालांकि, विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि चीन में हाल के वर्षों में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका घटी है, खासकर राजनीतिक और नीतिगत नेतृत्व में शीर्ष स्तरों पर।
चीन में सत्तारूढ़ सीपीसी ने लैंगिक समानता के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर दशकों से माओ जेदोंग के इस प्रसिद्ध नारे को बढ़ावा दिया है कि “महिलाएं आधा आसमान थामे हुए हैं।”
हालांकि, सीपीसी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ में प्रकाशित विभिन्न लेखों के विश्लेषण पर आधारित एक नये अध्ययन की मानें तो हाल के वर्षों में चीन के सरकारी मीडिया के विमर्श में बदलाव देखने को मिला है और इसमें मुख्य रूप से महिलाओं की घरेलू और पारिवारिक भूमिकाओं पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
सीपीसी दशकों से दावा करती आ रही है कि महिलाओं ने “समाजवादी आधुनिकीकरण, सुधार और खुलापन लाने” में सक्रिय भूमिका निभाई है। हालांकि, हांगकांग स्थित दो शोधकर्ताओं के मुताबिक, चीन के सरकारी मीडिया में 1990 के दशक के अंत में महिलाओं के चित्रण में व्यापक बदलाव दिखना शुरू हो गया।
‘फ्रंटियर इन सोशियोलॉजी’ पत्रिका में मई में प्रकाशित शोध में पाया गया कि ‘पीपुल्स डेली’ ने महिलाओं की घरेलू और पारिवारिक भूमिकाओं पर अधिक जोर दिया है, जबकि सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिकाओं को कमतर करके आंका है।
हांगकांग पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय की जिया वांग और हांगकांग विश्वविद्यालय की रूयू झांग ने ‘पीपुल्स डेली’ में 1990 से 2023 के बीच प्रकाशित 1.25 लाख से अधिक लेख का विश्लेषण किया।
उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों की पहचान की, जिनमें ‘अग्रणी महिला’, ‘जुझारू महिला’, ‘करियर’ और ‘उद्यमिता’ जैसे शब्द शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने निजी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने के लिए प्रयुक्त शब्दों की भी पहचान की, जिसमें ‘परिवार’, ‘बच्चे पैदा करना’, ‘घरेलू काम’ और ‘प्यार करने वाली मां’ शामिल हैं।
उन्होंने इस बात का विश्लेषण किया कि समय बीतने के साथ दोनों समूह के शब्दों के साथ ‘फीमेल’ और ‘वुमन’ जैसे तटस्थ शब्द कितनी बार इस्तेमाल किए गए।
शोधकर्ताओं ने पाया कि निजी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिकाओं को रेखांकित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों के साथ ‘फीमेल’ और ‘वुमन’ जैसे तटस्थ शब्दों का प्रयोग लगातार बढ़ता गया।
भाषा पारुल प्रशांत
प्रशांत

Facebook


