यूरोप में भीषण गर्मी भौंरों के लिए साबित हो रही जानलेवा
यूरोप में भीषण गर्मी भौंरों के लिए साबित हो रही जानलेवा
(एलेक्स डिट्रिच, नॉटिंघम ट्रेंट विश्वविद्यालय)
नॉटिंघम (ब्रिटेन), 13 जुलाई (द कन्वरसेशन) संभव है कि गर्मियों के महीनों में आपको अपने आस-पास फुटपाथ पर मरे हुए भौंरे (बम्बलबीज) दिखाई दें।
इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें कुछ मौसमी और काफी हद तक इंसानी गतिविधियां हैं।
भौंरे सामाजिक होते हैं और कॉलोनियों में रहते हैं। इन कॉलोनियों को बहुत सक्रिय मजदूर भौंरें चलाते हैं, जिनकी उम्र बहुत छोटी यानी चार से छह हफ्ते की होती है।
इसका अभिप्राय है कि काफ़ी कम समय में ही बूढ़े होकर ये भौंरें मर जाते हैं और कॉलोनी में बीमारी फैलने से रोकने के लिए, स्वस्थ युवा मजदूर भौंरे मरे हुए भौंरों को बाहर निकालकर कॉलोनी से काफ़ी दूर ले जाते हैं।
एक और वजह मौसम है। 2026 में इंग्लैंड में जून का महीना अब तक का सबसे गर्म रहा (और पूरे ब्रिटेन के लिए यह दूसरा सबसे गर्म महीना था) और इस गर्मी में तापमान के और भी ज्यादा रहने की आशंका है।
इस तरह की अत्यधिक गर्मी से भौंरों में तनाव पैदा होता है। लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से उनके विकास पर असर पड़ता है और उनकी आबादी की लंबे समय की स्थिरता खतरे में पड़ जाती है।
भीषण गर्मी का नकारात्मक असर इन भौंरों के प्रजनन, उड़ने और भोजन की तलाश करने की क्षमता पर भी पड़ता है। भौंरों जैसे सामाजिक कीट छत्ते का तापमान ठीक रखने के लिए ठंडक पहुंचाने वाले तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि ज़्यादा गर्मी होने पर अपने पंख फड़फड़ाना; लेकिन बहुत ज़्यादा गर्मी में ये तरीके कितने असरदार हो सकते हैं, इसकी भी एक सीमा होती है।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, भौंरों की भोजन तलाशने की गतिविधि बढ़ सकती है और वे ज़्यादा दूरी तय कर सकते हैं। उड़ते समय भौंरे अपने शरीर में गर्मी को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर अपने तापमान को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन तापमान की अति-सीमाएं उनके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।
डैंडेलियन प्रजाति के पौधों को नष्ट न करें
भौंरों की मौत में अन्य कारणों की भी अहम भूमिका है। कीटनाशकों और खरपतवार-नाशकों का इस्तेमाल आम बात है और ये रसायन भौंरों की सेहत पर बुरा असर डालते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
हालांकि, ये रसायन न केवल भौंरों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं बल्कि उन ज़रूरी पौधों को भी खत्म कर सकते हैं जिन पर वे अपने भोजन के लिए निर्भर रहते हैं, जिससे वे भूखे मर सकते हैं। उदाहरण के लिए, डैंडेलियन प्रजाति का पादप शहद का एक बहुत ज़रूरी स्रोत हैं, लेकिन इन्हें अक्सर खरपतवार नाशक से खत्म कर दिया जाता है। इसलिए अपने बगीचे से इन्हें खरपतवार समझकर उखाड़ें नहीं।
कीटनाशकों का इस्तेमाल भौंरों की आबादी घटने की मुख्य ऐतिहासिक वजहों में से एक है। यह विरोधाभास ही है कि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक ही उन जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं जो फसलों के परागण में मदद करते हैं।
ऑर्गेनोफॉस्फेट, सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड और फेनिलपाइराजोल जैसे कीटनाशक इन कीड़ों को लकवाग्रस्त कर देते हैं और मार देते हैं, साथ ही भौंरों के रास्ता तलाशने की क्षमता में भी बाधा डालते हैं।
भौंरों के लिए उनके रहने की जगह का खत्म होना एक और बड़ी समस्या है, क्योंकि ज़मीन का इस्तेमाल घरों के निर्माण, बड़े पैमाने पर खेती और सड़कों जैसी इंसानी संरचनाओं के लिए किया जा रहा है। भौंरों के प्रजनन में मददगार इन जगहों की कमी उनकी आबादी को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है।
जलवायु परिवर्तन नयी समस्याएं पैदा कर रहा
समय के साथ समन्वय की कमी तब देखने को मिलती है जब एक-दूसरे पर निर्भर दो जीव गलत समय पर सामने आते हैं और यह अब बदलते मौसम के कारण ऐसा हो रहा है।
इसका एक उदाहरण यह है कि जिन पौधों पर भौंरें निर्भर होते हैं, उनमें फूल तब आते हैं जब भौरें वहां नहीं होते।
भौंरों पर मंडरा रहा खतरा
कीड़े-मकोड़े धरती पर जानवरों का सबसे विविध और बड़ी संख्या वाला समूह हैं, लेकिन इस दबदबे के बावजूद, उन पर सबसे ज़्यादा खतरा मंडरा रहा है।
हम बहुत तेजी से अपने भौंरों की प्रजातियों को खो रहे हैं। यूरोप में, जिन जंगली भौंरों की प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है, उनकी संख्या 2014 में 77 थी जो अब बढ़कर कम से कम 172 हो गई है (यानी जांची गई प्रजातियों का लगभग 10 प्रतिशत)।
भौंरे कीटों के सबसे विविध समूहों में से एक हैं। वे दुनिया भर में फसलों के परागण का लगभग 75 प्रतिशत और सभी फूलों वाले पौधों के परागण का लगभग 90 प्रतिशत काम करते हैं। बाकी पौधों का परागण दूसरे जानवरों या हवा और मौसम से हो सकता है।
अगर हम परागण करने वाले जीवों से मिलने वाली खाद्य सुरक्षा खो देते हैं, तो हमें दुनिया भर में खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कुछ किया जा सकता है?
कीटनाशकों के इस्तेमाल के मामले में, सोच-समझकर और जानकारी के साथ खरीदारी करने वाले ग्राहक बनें। जहां तक संभव हो, स्थानीय और टिकाऊ तरीके से उगाए गए भोजन को बढ़ावा दें और अगर मुमकिन हो, तो ऐसे किसानों से खरीदें जो पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
भौंरों के रहने की जगह खत्म होने की समस्या से निपटने का एक आसान तरीका है उनके लिए स्थानीय प्रजातियों के हिसाब से जगह बनाना। अलग-अलग तरह के स्थानीय फूल वाले पौधे लगाएं और लॉन के कुछ हिस्सों की घास न काटें। इससे मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित जगह बनाने में मदद मिल सकती है।
(द कन्वरसेशन) नरेश धीरज मनीषा
मनीषा

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