जिनेवा, 26 फरवरी (एपी) ईरान और अमेरिका ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बृहस्पतिवार को जिनेवा में कई घंटे लंबी वार्ता की। इसे कूटनीति का अंतिम अवसर माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर समझौते की खातिर दबाव डालने के लिए पश्चिम एशिया में विमानों और युद्धपोतों का एक बेड़ा तैनात किया है।
पिछले साल जून के बाद से अमेरिका-ईरान के बीच यह तीसरे दौर की वार्ता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए समझौता चाहते हैं और वह पिछले महीने ईरान में हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद देश में बढ़ते असंतोष को अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, ईरान लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन जारी रखना चाहता है।
ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो पश्चिम एशिया में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे उसके निशाने पर होंगे।
जिनेवा रवाना होने से पहले बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ‘इंडिया टुडे’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘किसी को भी जीत नहीं मिलेगी, यह एक विनाशकारी युद्ध होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि अमेरिकी सैन्य अड्डे इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर फैले हुए हैं, इसलिए दुर्भाग्यवश संभवतः पूरा क्षेत्र इस लड़ाई की चपेट में आ जाएगा, जो बहुत ही भयावह स्थिति होगी।’’
एपी शफीक अविनाश
अविनाश