जिनेवा, 26 फरवरी (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत आतंकवाद का कड़ा विरोध करता है और इस समस्या का सामना करने के लिए सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से “आतंकवादी कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने” का आग्रह किया।
जयशंकर बुधवार को यूएनएचआरसी के 61वें सत्र के दौरान एक कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से ग्रस्त विश्व में साझा आधार खोजने और उसका विस्तार करने का प्रयास करता है।
उन्होंने कहा, “हमने हमेशा टकराव के बजाय संवाद, विभाजन के बजाय सहमति और संकीर्ण हितों के बजाय मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया है।”
उन्होंने कहा, “…हम आतंकवाद का कड़ा विरोध करते है। आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे जघन्य उल्लंघन है और इसका कोई औचित्य नहीं हो सकता, खासकर जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है।’’
जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है और हम इस परिषद और संयुक्त राष्ट्र से आतंकवादी कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने की अपेक्षा करते हैं।”
जयशंकर ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस समझ पर आधारित है कि किसी भी क्षेत्र की असुरक्षा या किसी भी समूह का हाशिए पर होना अंततः सभी के अधिकारों को कमज़ोर करता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की मानवीय सहायता भौगोलिक सीमाओं से अधिक सहानुभूति से प्रेरित रही है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत, चिकित्सा आपूर्ति, टीके, खाद्यान्न या विकास साझेदारी के माध्यम से भारत कई देशों के लिए भरोसेमंद सहयोगी रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए मानवाधिकार “वसुधैव कुटुंबकम” की उसकी सभ्यतागत भावना का अभिन्न हिस्सा है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है।
भाषा
राखी अविनाश
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