(क्रिस्टोफ रैंडलर, प्रोफेसर, जीवविज्ञान विभाग, टुबिंगन विश्वविद्यालय)
लंदन, 26 फरवरी (द कन्वरसेशन) सुबह पांच बजे उठने के बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किये जाते हैं और इसके पक्ष में अनेक दलीलें दी जाती हैं।
उत्पादकता बढ़ाने के बारे में राय देने वाले विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि यही वह दिनचर्या है जो उच्च प्रदर्शन करने वालों को बाकी सभी से अलग करती है। इस विचार को एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक, उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन और हॉलीवुड अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन जैसे चर्चित हस्तियों की सुबह जल्दी उठने की आदत से भी बल मिलता है।
संदेश सीधा है: जल्दी उठिये, बेहतर प्रदर्शन कीजिए। लेकिन विज्ञान इससे कहीं अधिक जटिल कहानी बताता है। कई लोगों के लिए सुबह पांच बजे की दिनचर्या उनके शरीर के अनुकूल नहीं होती और इससे स्वास्थ्य एवं उत्पादकता दोनों प्रभावित हो सकती है। बहुत कुछ आपके ‘क्रोनोटाइप’ पर निर्भर करता है। ‘क्रोनोटाइप’ का मतलब किसी व्यक्ति की नैसर्गिक प्रवृत्ति। कोई व्यक्ति सुबह जल्दी उठकर सबसे ऊर्जावान होता है, यानी ‘मॉर्निंग क्रोनोटाइप’ और कोई व्यक्ति देर रात सक्रिय और ऊर्जावान होता है यानी ‘इवनिंग क्रोनोटाइप’।
‘क्रोनोटाइप’ यह दर्शाते हैं कि लोग स्वाभाविक रूप से कब सक्रिय महसूस करते हैं और कब उन्हें नींद आती है और इसमें आनुवंशिकी की बड़ी भूमिका होती है। शोध से पता चलता है कि सोने-जागने का समय आंशिक रूप से हमारे जीन में निहित होता है, और क्रोनोटाइप वंशानुगत होता है।
‘क्रोनोटाइप’ जीवन में बदलता भी है। किशोरों में सामान्यत: सोने और जागने का समय देर का होता है, जबकि बुज़ुर्ग अक्सर जल्दी सोने और जल्दी उठने हैं।
सुबह जल्दी सक्रिय रहने वाले लोगों यानी ‘मॉर्निंग क्रोनोटाइप’ का आम तौर पर बेहतर शैक्षणिक परिणाम होता है, जिसमें स्कूल और विश्वविद्यालय में उच्च प्रदर्शन शामिल है। वे सामान्यतः धूम्रपान, शराब और नशीले पदार्थों का कम सेवन करते हैं और उनके नियमित रूप से व्यायाम करने की संभावना अधिक होती है।
देर रात तक सक्रिय रहने वाले लोग यानी ‘इवनिंग क्रोनोटाइप’ औसतन अधिक थकान का अनुभव करते हैं और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत अधिक करते हैं।
एक आम मान्यता यह है कि सुबह जल्दी उठने की दिनचर्या अपनाने से प्राकृतिक ‘मॉर्निंग टाइप’ (सुबह जल्दी सक्रिय रहने वाले) लोगों जैसी ही लाभकारी स्थिति प्राप्त हो जाएगी। हालांकि, ‘क्रोनोटाइप’ आसानी से बदला नहीं जा सकता।
‘क्रोनोटाइप’ को आनुवंशिकी और शरीर की जैविक घड़ी आकार देती है। कई लोगों के लिए अपनी प्राकृतिक लय से पहले उठना समय के साथ नींद की कमी, ध्यान में कमी और मूड खराब होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
केवल जल्दी उठना सफलता की गारंटी नहीं देता। लोग आम तौर पर सबसे अच्छा प्रदर्शन तब करते हैं जब उनकी दैनिक दिनचर्या जैविक लय के अनुरूप होती है।
जल्दी उठने के प्रयोग शुरू में प्रभावी लग सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे दिनचर्या स्थिर होती है, शरीर का जैविक लय और निर्धारित समय में असंतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है। कुछ लोगों, विशेषकर देर रात सक्रिय रहने वाले लोगों के लिए, जबरदस्ती जल्दी उठना इस असंतुलन को और बढ़ा सकता है।
द कन्वरसेशन
अमित माधव
माधव