Private Employee Bonus: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, मिल सकता है इतने प्रतिशत बोनस, जानिए नए लेबर कोड का नियम

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, मिल सकता है इतने प्रतिशत बोनस, Private Employees will get 20 Percent Bonus

Private Employee Bonus: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, मिल सकता है इतने प्रतिशत बोनस, जानिए नए लेबर कोड का नियम
Modified Date: September 8, 2026 / 07:13 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:46 pm IST
HIGHLIGHTS
  • ₹21 हजार तक वेतन वालों को मिल सकता है वैधानिक बोनस
  • न्यूनतम 8.33%, अधिकतम 20% तक बोनस का प्रावधान
  • बोनस की गणना ₹7 हजार या लागू न्यूनतम वेतन पर होगी

नई दिल्ली। Private Employees Bonus अगर आप किसी प्राइवेट दफ्तर में काम करते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। दरअसल, नए लेबर कोड से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ₹21,000 तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को वैधानिक बोनस का लाभ मिल सकता है। इसके लिए संबंधित लेखा वर्ष में कम से कम 30 दिन काम करना समेत अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। नए प्रावधानों के तहत पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33 फीसदी बोनस मिलना तय है, जबकि परिस्थितियों और उपलब्ध सरप्लस के आधार पर यह अधिकतम 20 फीसदी तक हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी को उसकी पूरी सैलरी का 20 फीसदी बोनस मिलेगा।

Private Employees Bonus मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Code on Wages, 2019 की धारा 26 के मुताबिक, बोनस की कैलकुलेशन के लिए ₹7,000 प्रति माह या संबंधित न्यूनतम वेतन, जो भी ज्यादा हो, उसे आधार माना जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की वास्तविक मासिक मजदूरी ₹15,000 है और उसके काम के लिए संबंधित राज्य में न्यूनतम वेतन ₹10,000 तय है, तो बोनस की कैलकुलेशन ₹15,000 पर नहीं बल्कि ₹10,000 पर होगी। ऐसे कर्मचारी को न्यूनतम 8.33% बोनस के हिसाब से सालाना करीब ₹9,996 बोनस मिलेगा। इसी तरह अगर किसी कर्मचारी की मासिक मजदूरी ₹20,000 है, लेकिन उसके वर्ग के लिए लागू न्यूनतम वेतन ₹9,000 है, तो बोनस की गणना ₹9,000 के आधार पर होगी।

₹21 हजार से ज्यादा वेतन वालों का क्या? (Private Employees Bonus)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन प्राइवेट कर्मचारियों की मासिक मजदूरी ₹21,000 से अधिक है, उनके लिए इस कानून के तहत वैधानिक बोनस देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कंपनी की अपनी नीति, रोजगार अनुबंध या अन्य प्रावधानों के तहत ऐसे कर्मचारियों को बोनस मिल सकता है। वेतन संहिता के तहत बोनस की राशि लेखा वर्ष समाप्त होने के आठ महीने के भीतर भुगतान किए जाने का प्रावधान है। विशेष परिस्थितियों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। यदि पात्र कर्मचारी को वैधानिक बोनस का भुगतान नहीं किया जाता है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना दावा कर सकता है। कर्मचारी स्वयं, पंजीकृत ट्रेड यूनियन या संबंधित अधिकारी के माध्यम से दावा किया जा सकता है।

20 फीसदी बोनस हर किसी के लिए नहीं

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹21,000 की सीमा बोनस की पात्रता से जुड़ी है, जबकि बोनस की गणना के लिए ₹7,000 या लागू न्यूनतम वेतन में से अधिक राशि को आधार बनाया जाता है। वहीं, 8.33 फीसदी न्यूनतम और 20 फीसदी अधिकतम वैधानिक सीमा है। ऐसे में ₹21,000 तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपनी पात्रता, लागू न्यूनतम वेतन और बोनस की गणना के आधार की जानकारी रखना जरूरी है। वास्तविक बोनस राशि संबंधित संस्थान के उपलब्ध सरप्लस और लागू वैधानिक प्रावधानों के आधार पर तय होगी।


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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।