ट्रंप इसे एक ‘बड़ी कामयाबी’ बता रहे हैं, लेकिन क्या हमास सच में गाजा में हथियार छोड़ेगा?

ट्रंप इसे एक ‘बड़ी कामयाबी’ बता रहे हैं, लेकिन क्या हमास सच में गाजा में हथियार छोड़ेगा?

ट्रंप इसे एक ‘बड़ी कामयाबी’ बता रहे हैं, लेकिन क्या हमास सच में गाजा में हथियार छोड़ेगा?
Modified Date: August 1, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: August 1, 2026 4:25 pm IST

(मार्टिन कियर, सिडनी विश्वविद्यालय)

सिडनी, एक अगस्त (द कन्वरसेशन) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि हमास और गाजा के दूसरे चरमपंथी गुट हथियार छोड़ने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप इसे इस क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में एक ‘‘अहम कदम’’ बता रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि हमास के निशस्त्रीकरण के बाद एक फलस्तीनी समिति गाजा का प्रशासन संभाल सकेगी और इजराइल की सेना इस क्षेत्र से हट जाएगी। यह सब ट्रंप के 20-सूत्री शांति योजना के तहत होगा, जिस पर हमास और इजराइल पिछले साल अक्टूबर में सहमत हुए थे।

हमास के अधिकारियों का कहना है कि वे इस प्रक्रिया के लिए सहमत हो गए हैं, हालांकि बातचीत करने वाली टीम के एक सदस्य ने चेतावनी दी कि उनका हथियार छोड़ना इजराइल के गाजा से पूरी तरह हटने पर निर्भर करेगा। तो, क्या यह आगे बढ़ने की ओर एक बड़ा कदम है, या अब भी बहुत सारे सवाल अनसुलझे हैं?

हमास की वैधता : अगर हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ने के लिए सहमत हो जाता है, तो यह वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम पर इजराइल के कब्जे के खिलाफ लगभग 40 साल के संघर्ष में इस संगठन की ओर से एक बहुत बड़ा बदलाव होगा।

हमास की शुरुआत 1987 में दो लक्ष्यों के साथ हुई थी, जिसमें इजराइल के कब्जे का विरोध करना और फलस्तीनी राजनीति में फतह पार्टी के दबदबे को चुनौती देना शामिल था।

अपने 2017 के चार्टर में, हमास ने कहा कि वह ‘‘संघर्ष और उसकी सशस्त्र कार्रवाई को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को खारिज करता है’’।

उसने यह भी कहा कि ‘‘सशस्त्र संघर्ष… फलस्तीनी लोगों के सिद्धांतों और अधिकारों की रक्षा के लिए रणनीतिक विकल्प माना जाता है’’।

इसके अलावा, हमास का सशस्त्र संघर्ष फलस्तीनियों के बीच उसकी वैधता का मुख्य आधार है। साथ ही फलस्तीनियों के लिए, यह संघर्ष देश का पूर्ण दर्जा पाने की कोशिशों से गहराई से जुड़ा हुआ है।

इसका अर्थ यह है कि फलस्तीनी आवश्यक नहीं कि राजनीतिक रूप से हमास का समर्थन करते हों या उसके इस्लामी एजेंडे से सहमत हों, लेकिन वे इस संगठन के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि इज़राइल के कब्ज़े के विरुद्ध उसका लगातार जारी सशस्त्र प्रतिरोध या तो फ़िलस्तीनी राज्य की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाता है, या फिर इज़राइल के लिए अपने कब्ज़े को स्थायी बनाने की कोशिशों में बाधा उत्पन्न करता है।

अक्टूबर 2025 में ‘पीपल्स कंपनी फॉर पोल्स एंड सर्वे रिसर्च’ द्वारा फलस्तीनियों के बीच किए गए सबसे हालिया सर्वेक्षण में, 60 प्रतिशत लोगों (वेस्ट बैंक में 66 प्रतिशत और गाजा में 51 प्रतिशत) ने हमास के कामकाज पर संतोष जताया और 69 प्रतिशत लोग (वेस्ट बैंक में 87 प्रतिशत और गाजा में 55 प्रतिशत) गाजा पट्टी में हमास के हथियार छोड़ने के खिलाफ थे।

सर्वेक्षण के नतीजे को देखते हुए, यह मानना ​​मुश्किल है कि हमास फलस्तीनियों के बीच मिले इस स्तर के समर्थन को नजरअंदाज करेगा।

जानकारी साफ नहीं है : शुरुआती मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमास के हथियार छोड़ने की प्रक्रिया में न केवल उसके हथियार सौंपना शामिल होगा, बल्कि गाजा में उसके सैन्य ढांचे को खत्म करना भी शामिल होगा। इसमें संगठन के सुरंगों का नेटवर्क, भारी हथियार, हथियार उत्पादन इकाई और हथियारों के गोदाम शामिल होंगे।

गाजा पट्टी में हुई भारी तबाही को देखते हुए, यह साफ नहीं है कि इस ढांचे का कितना हिस्सा अब भी बचा हुआ है।

यह भी साफ नहीं है कि हमास की सैन्य शाखा के पास असल में कितने हथियार हैं। हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि उसके पास हजारों स्वचालित राइफल और एंटी-टैंक रॉकेट जैसे भारी हथियार हो सकते हैं, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत कम हो सकती है।

इसके अलावा ये तथ्य भी स्पष्ट नहीं हैं कि हमास से हथियार वापस लेने का काम कौन करेगा और इसकी पुष्टि कैसे होगी? एक अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इसके लिए एक तृतीय पक्षीय समिति जिम्मेदार होगी, लेकिन उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

एक अहम बात ये भी है कि हमास सिफ गाजा पट्टी में ही सक्रिय नहीं है, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में भी उसकी मौजूदगी है। यह साफ नहीं है कि हथियार छोड़ने की यह प्रक्रिया समूह के उन हिस्सों पर भी लागू होगी या नहीं।

इजराइल क्या करेगा : इस समझौते पर इजराइल की प्रतिक्रिया एक और बड़ी चुनौती है। शुरुआती खबरों से पता चलता है कि इजराइल की सरकार ट्रंप की योजना पर आपत्ति जता रही है।

एक इजराइली अधिकारी ने ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ से कहा, ‘‘जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता और गाजा पट्टी को पूरी तरह से हथियार-मुक्त नहीं कर दिया जाता, तब तक इजराइल गाजा पट्टी में ‘येलो लाइन’ से पीछे नहीं हटेगा।’’

(द कन्वरसेशन) शफीक पवनेश

पवनेश


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