ट्रंप ने अपने कार्यकाल में शुल्क को मुख्य मुद्दा बनाया, फैल सकती है अराजकता

ट्रंप ने अपने कार्यकाल में शुल्क को मुख्य मुद्दा बनाया, फैल सकती है अराजकता

ट्रंप ने अपने कार्यकाल में शुल्क को मुख्य मुद्दा बनाया, फैल सकती है अराजकता
Modified Date: February 21, 2026 / 12:59 am IST
Published Date: February 21, 2026 12:59 am IST

वाशिंगटन, 20 फरवरी (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शुल्क (टैरिफ) पर अकेले चलने की कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि ट्रंप के पास आर्थिक आपातकाल घोषित करने और आयात पर बड़े पैमाने पर नए कर लगाने की शक्ति नहीं है।

ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने आर्थिक प्रस्तावों का आधार टैरिफ को बनाया था, यहां तक ​​कि उन्होंने टैरिफ को ‘शब्दकोश का अपना पसंदीदा शब्द’ भी बताया था। उन्होंने वादा किया था कि कारखाने विदेशों से वापस आएंगे और अपने साथ नौकरियां लाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि टैरिफ हटाने से अमेरिका गहरी मंदी में डूब सकता है।

लेकिन शुक्रवार को दिए गए न्यायालय के फैसले से मध्यावधि चुनाव वाले वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर राजनीतिक और आर्थिक अराजकता के और भी लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।

जब न्यायालय का फैसला आया तक ट्रंप कई गवर्नर के साथ बैठक कर रहे थे जो जल्द ही समाप्त हो गई।

रिपब्लिकन रणनीतिकार डग हेये ने कहा कि यह तुरंत स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति इस फैसले से ‘खुश नहीं होंगे’।

हालांकि, हेये ने कहा कि ट्रंप अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोई और रास्ता खोजने की कोशिश करेंगे।

उन्होंने पूछा, ‘क्या वह इसे एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करने का तरीका ढूंढ पाएंगे या नहीं? बहुत सारे सवाल हैं।’

ट्रंप के टैरिफ के आक्रामक इस्तेमाल ने कई रिपब्लिकन सांसदों को सार्वजनिक और व्यक्तिगत रूप से असहज कर दिया था। उन्हें कर बढ़ाने के लिए बचाव करना पड़ा।

ट्रंप के पहले कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे माइक पेंस ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को जनता की जीत बताया।

डेमोक्रेट नेताओं ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी। पार्टी सांसद सुजैन डेलबेन डीवाश ने कहा कि ट्रंप ‘‘कोई राजा नहीं हैं’’ और उनकी शुल्क व्यवस्था हमेशा गैरकानूनी थी।

एपी

वैभव शुभम

वैभव


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