जिन्ना की बीमारी गुप्त रखने के लिए मुंबई के दो चिकित्सकों को दिया जाएगा ‘निशान-ए-इम्तियाज’
जिन्ना की बीमारी गुप्त रखने के लिए मुंबई के दो चिकित्सकों को दिया जाएगा ‘निशान-ए-इम्तियाज’
इस्लामाबाद, 19 अगस्त (भाषा) पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना के एक गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझने की बात को गुप्त रखने के लिए मुंबई के दो चिकित्सकों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से नवाजा जाएगा। योजना मंत्री एहसान इकबाल ने यह जानकारी दी।
इकबाल ने 14 अगस्त को असैन्य और सैन्य सम्मानों के लिए चुने गए नामों की घोषणा के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “पुरस्कार समिति के अध्यक्ष के रूप में मुझे दो बेहतरीन चिकित्सकों-एक फिजिशियन और एक रेडियोलॉजिस्ट-को ‘निशान-ए-इम्तियाज’ के लिए नामित करने का सौभाग्य मिला। मुंबई में रहने वाले और पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इन चिकित्सकों ने कायद-ए-आजम मुहम्मद अली जिन्ना के गंभीर बीमारी से जूझने की बात को पूरी ईमानदारी से गोपनीय रखा था।”
हालांकि, इकबाल ने ‘निशान-ए-इम्तियाज’ के लिए चुने गए दोनों चिकित्सकों के नाम नहीं बताए और ना ही यह बताया कि उनकी तरफ से पुरस्कार कौन ग्रहण करेगा।
इकबाल ने कहा कि जिन्ना के खराब स्वास्थ्य के बारे में कोई भी जानकारी सामने आने से 1947 में पाकिस्तान की एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।
उन्होंने कहा, “कई इतिहासकार इसे 20वीं सदी के सबसे अहम रहस्यों में से एक मानते हैं। लॉर्ड माउंटबेटन ने बाद में स्वीकार किया था कि अगर उन्हें पता होता कि जिन्ना कितने गंभीर रूप से बीमार थे, तो शायद वह बंटवारे को टाल देते। इससे इतिहास की धारा बदल सकती थी और शायद पाकिस्तान की स्थापना पर भी खतरा मंडरा सकता था।”
पाकिस्तान में असैन्य और सैन्य पुरस्कारों के विजेताओं के नाम देश के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) पर घोषित किए जाते हैं। राष्ट्रपति पाकिस्तान दिवस (23 मार्च) पर आयोजित सम्मान समारोह में विजेताओं को औपचारिक रूप से सम्मानित करते हैं।
जिन्ना तपेदिक से पीड़ित थे, जो उस समय एक लाइलाज बीमारी थी। उनका भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के लगभग एक साल बाद सितंबर 1948 में 71 साल की उम्र में निधन हो गया था।
पाकिस्तान सरकार ने 1998 में अभिनेता दिलीप कुमार को ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से सम्मानित किया था।
भाषा पारुल वैभव
वैभव

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