इजराइल में अति-रूढ़िवादी यहूदियों का अनिवार्य सेना भर्ती के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन

इजराइल में अति-रूढ़िवादी यहूदियों का अनिवार्य सेना भर्ती के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन

इजराइल में अति-रूढ़िवादी यहूदियों का अनिवार्य सेना भर्ती के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन
Modified Date: June 2, 2026 / 10:29 am IST
Published Date: June 2, 2026 10:29 am IST

यरुशलम, दो जून (एपी) इजराइल में हजारों अति-रूढ़िवादी यहूदियों ने अनिवार्य सैन्य भर्ती के विरोध में सोमवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सड़कें जाम कर दीं, रेल यातायात बाधित कर दिया और कुछ स्थानों पर कारों में आग लगा दी।

इजराइल पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख चौराहों को अवरुद्ध कर दिया और एक बस से उतरे सैनिक पर हमला किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा।

इस प्रदर्शन से देश के मध्य क्षेत्र में जनजीवन लगभग ठप हो गया। यरुशलम और तेल अवीव में प्रमुख राजमार्ग बंद हो गए तथा सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित रहीं।

इजराइल में अधिकतर यहूदी पुरुषों और महिलाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, राजनीतिक रूप से प्रभावशाली अति-रूढ़िवादी दल वर्षों से अपने समर्थकों के लिए ऐसी छूट हासिल करते रहे हैं, जिसके तहत वे सेना में भर्ती होने के बजाय धार्मिक शिक्षण संस्थानों (येशिवा) में अध्ययन कर सकते हैं। अब यह छूट खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है।

इजराइल में बड़ी संख्या में लोग इस लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। यह असंतोष ऐसे समय में और बढ़ गया है, जब देश की सेना अभूतपूर्व दबाव झेल रही है और अनेक नागरिकों को रिजर्व ड्यूटी के लिए बार-बार मोर्चे पर लौटना पड़ा है।

यह विवाद अब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के लिए भी गंभीर राजनीतिक संकट का कारण बन गया है। अति-रूढ़िवादी दलों द्वारा नेतन्याहू सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद गठबंधन में दरार और गहरी हो गई है। इसके चलते इस वर्ष शरद ऋतु में होने वाले चुनाव निर्धारित समय से कई सप्ताह पहले कराए जाने की संभावना भी बढ़ गई है।

यरुशलम में प्रदर्शन कर रहे इजराइल ट्रॉपर ने कहा, ‘‘यह समुदाय अपने इरादे पर अडिग है। वे इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मानते हैं। उनकी नजर में इजराइली सेना में शामिल होने का मतलब अपने धर्म से समझौता करना है। हम अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहते, इसलिए हमारे लिए यह जीवन और आस्था दोनों की रक्षा की लड़ाई है।’’

उन्होंने कहा कि इस विचार का तीखा विरोध करने वाले हजारों लोगों को जबरन सेना में भर्ती कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

इजराइल में अति-रूढ़िवादी यहूदियों की आबादी लगभग 13 प्रतिशत है और यह देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला सामाजिक वर्ग माना जाता है। परंपरागत रूप से, यदि वे पूर्णकालिक रूप से धार्मिक शिक्षण संस्थानों में अध्ययन करते हैं, तो उन्हें सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है।

इजराइल के उच्चतम न्यायालय ने 2017 में इन छूटों को अवैध करार दिया था। हालांकि, बार-बार दी गई समय-सीमा में बढ़ोतरी और सरकारी टालमटोल के कारण यह व्यवस्था अब तक जारी है।

इजराइल के यहूदी बहुसंख्यक समाज में अनिवार्य सैन्य सेवा को केवल राष्ट्रीय दायित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकीकरण और वयस्क जीवन में प्रवेश के महत्वपूर्ण संस्कार के रूप में भी देखा जाता है।

एपी खारी रंजन

रंजन


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