लंदन, 24 अप्रैल (भाषा) संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों और महिलाओं को अगवा किए जाने तथा जबरन शादी के जरिये उनका धर्मांतरण कराए जाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि “कार्रवाई की कमी” ऐसे मामलों में वृद्धि का कारण बन रही है।
जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) के विशेषज्ञों ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “धर्म या आस्था में कोई भी बदलाव वास्तव में दबाव मुक्त होना चाहिए। साथ ही शादी दोनों पक्षों की पूर्ण एवं दबाव मुक्त सहमति पर आधारित होनी चाहिए, जो कानूनी रूप से तब संभव नहीं है, जब पीड़ित नाबालिग हो।”
विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान में 2025 में अपहरण, जबरन शादी और धर्मांतरण से पीड़ित लड़कियों एवं महिलाओं में से लगभग 75 फीसदी हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई समुदाय की थीं। उन्होंने कहा कि ऐसी लगभग 80 फीसदी घटनाएं सिंध प्रांत से दर्ज की गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, “कार्रवाई की कमी” लगातार जारी इस कृत्य को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, “14 से 18 साल की उम्र की किशोरियों को खास तौर पर निशाना बनाया जाता है। गरीब और हाशिये पर रहने वाले परिवारों की लड़कियों और युवतियों के साथ ऐसे कृत्य होने की आशंका ज्यादा रहती है।”
विशेषज्ञों ने कहा कि पीड़ित लड़कियों और महिलाओं को न सिर्फ शारीरिक एवं यौन हिंसा, सामाजिक कलंक और गंभीर आघात का सामना करना पड़ता है, बल्कि धर्म और आस्था के पालन की उनकी आजादी भी छीन ली जाती है।
उन्होंने कहा, “ये महिलाएं और लड़कियां लगातार आतंक के साये में जी रही हैं… इसे रोकना होगा।”
भाषा मनीषा पारुल
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