कोलंबो, 22 अगस्त (भाषा) संयुक्त राष्ट्र ने शनिवार को श्रीलंका के उस फैसले का स्वागत किया, जिसके तहत भारत से शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी में तेजी लाने के लिए आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
ये शरणार्थी श्रीलंका के दशकों लंबे गृहयुद्ध के दौरान वैध दस्तावेजों के बिना देश छोड़कर भारत चले गए थे।
श्रीलंका सरकार ने इस महीने की शुरुआत में इस पहल के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जिसका उद्देश्य भारत से शरणार्थियों की वापसी को सुगम बनाने के लिए प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित करना था।
श्रीलंकाई शरणार्थी 1983 में श्रीलंका में शुरू हुई जातीय हिंसा और उसके बाद सरकारी बलों तथा ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (एलटीटीई) के बीच सशस्त्र संघर्ष बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में तमिलनाडु आने लगे। यह संघर्ष लगभग तीन दशकों तक चला था।
हालांकि, 2002 से 2022 के बीच लगभग 18,000 शरणार्थी अपने देश लौट गए, लेकिन लगभग 90,000 शरणार्थी अब भी दक्षिण भारत के राज्य में रह रहे हैं।
श्रीलंका में ‘रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर’ और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रतिनिधि मार्क-आंद्रे फ्रांशे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के माध्यम से यह अंतर-सरकारी संगठन इन शरणार्थियों की वापसी और पुनर्वास को सुगम बनाने के लिए काम जारी रखेगा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं श्रीलंकाई शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी की प्रक्रियाओं पर कैबिनेट के फैसले का स्वागत करता हूं। यह वर्षों से विस्थापित लोगों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप