गाजा संघर्ष के मुद्दे को सुलझाने में अमेरिका के प्रयास सराहनीय: भारत

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गाजा संघर्ष के मुद्दे को सुलझाने में अमेरिका के प्रयास सराहनीय: भारत

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  • Publish Date - January 29, 2026 / 12:34 PM IST,
    Updated On - January 29, 2026 / 12:34 PM IST

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 29 जनवरी (भाषा) भारत ने गाजा में ‘‘लंबे समय से जारी’’ संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रयासों की सराहना की, साथ ही इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के कार्यान्वयन के संबंध में हाल में हुई प्रगति पर भी ध्यान आकृष्ट किया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बुधवार को ये टिप्पणी की।

हरीश ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में अपने संबोधन में कहा, ‘‘गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के कार्यान्वयन के संबंध में हाल में हुई प्रगति पर भारत ने गौर किया है। भारत इस अवसर पर इस दीर्घकालिक मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका के प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त करता है।’’

पिछले साल नवंबर में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 29 सितंबर की ‘गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना’ का समर्थन किया गया था, जिसमें कहा गया है कि ‘‘गाजा एक आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र होगा जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा नहीं पैदा करेगा’’ और गाजा के लोगों के लाभ के लिए इसका पुनर्विकास किया जाएगा।

इस प्रस्ताव में एक ‘शांति बोर्ड’ (बीओपी) की स्थापना का भी स्वागत किया गया है जो एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञता रखने वाला ‘‘संक्रमणकालीन प्रशासन’’ होगा और व्यापक योजना के अनुसार गाजा के पुनर्विकास के लिए ढांचा तैयार करेगा तथा वित्तपोषण का समन्वय करेगा।

हरीश ने कहा कि गाजा का पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार तथा सार्वजनिक सेवाओं और मानवीय सहायता की बहाली एक अत्यंत कठिन कार्य है जिसके लिए फलस्तीनी भाइयों और बहनों के दर्द एवं पीड़ा को कम करने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय के निरंतर समर्थन एवं प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, हमें यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि आतंकवाद का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है और इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की जानी चाहिए।’’

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि गाजा में आवश्यक पुनर्निर्माण का पैमाना बहुत बड़ा है। भारत ने कहा कि यूएनओपीएस (संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय) का अनुमान है कि गाजा में छह करोड़ टन मलबा है।

हरीश ने कहा, ‘‘मलबे में हानिकारक पदार्थ भी मौजूद हैं। इसलिए, इस विशेष स्थिति से निपटने में पारंपरिक पुनर्निर्माण मॉडल सीमित साबित होंगे। तकनीकी सटीकता के साथ एक नवीन दृष्टिकोण की आवश्यकता है।’’

भारत ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति में क्रमिक सुधार हुआ है, लेकिन भीषण सर्दी और व्यापक स्तर पर हुए विनाश ने इस कार्य को कठिन बना दिया है।

उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन की कमी, स्वास्थ्य और शिक्षा, स्वच्छता और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच का अभाव, समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करता है।

भारत ने सुरक्षित मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अपील दोहराई और कहा कि सदस्य देशों को फलस्तीनी लोगों के सामान्य जीवन जीने के सपने का समर्थन करना चाहिए।

हरीश ने कहा कि राजनीतिक मोर्चे पर भारत ने हमेशा एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राष्ट्र का निरंतर समर्थन किया है। अपनी इस प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारत 1988 में फलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश बना।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने इस बात की वकालत की है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने का एकमात्र साधन संवाद और कूटनीति है।’’

भाषा सुरभि संतोष

संतोष