पेरिस, छह जनवरी (एपी) रूस के साथ संभावित युद्धविराम के बाद यूक्रेन की सुरक्षा तय करने में मदद करने वाली महत्वपूर्ण वार्ता के लिए यूक्रेन के सहयोगी मंगलवार को पेरिस में मिल रहे हैं, लेकिन इस वार्ता की प्रगति को लेकर अनिश्चितता बरकरार है क्योंकि ट्रंप प्रशासन का ध्यान वेनेजुएला पर टिका है और ग्रीनलैंड पर कब्जे की आशंकाओं के चलते यूरोप के साथ तनाव बढ़ रहा है।
वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने से पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तथाकथित ‘इच्छुक देशों के गठबंधन’ की इस ताजा बैठक के बारे में उम्मीद जताई थी।
महीनों से वे इस बात पर विचार कर रहे हैं कि यदि रूस यूक्रेन से लड़ना बंद करने पर सहमत होता है, तो भविष्य में किसी भी रूसी आक्रामकता को कैसे रोका जाए।
मैक्रों ने 31 दिसंबर को अपने संबोधन में कहा था कि सहयोगी शिखर सम्मेलन में ‘यूक्रेन की रक्षा करने और एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति सुनिश्चित करने’ के लिए ‘ठोस प्रतिबद्धताएं’ व्यक्त करेंगे।
मैक्रों के कार्यालय ने कहा कि मंगलवार की बैठक में अभूतपूर्व संख्या में अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे, जिनमें 27 राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों सहित 35 प्रतिभागी शामिल होंगे। अमेरिका का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर करेंगे।
ट्रंप द्वारा रविवार को रणनीतिक रूप से अहम और खनिज संपदा से भरपूर आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड को अमेरिका के अधीन करने के आह्वान को दोहराने के बाद विटकॉफ और कुशनर फ्रांस की यात्रा पर आए।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और उनके ग्रीनलैंड के समकक्ष जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रंप की टिप्पणियों की निंदा की और द्वीप पर कब्ज़ा करने के किसी भी अमेरिकी प्रयास के विनाशकारी परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि यह नाटो सैन्य गठबंधन के अंत के समान होगा।
कई यूरोपीय नेताओं ने उनका साथ दिया, लेकिन महाद्वीप को यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी को पुष्ट करने और रूस की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए अमेरिकी सैन्य शक्ति की भी आवश्यकता है। इसके लिए पेरिस में एक नाजुक कूटनीतिक संतुलन की आवश्यकता हो सकती है।
मादुरो को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान से पहले विटकॉफ ने यूक्रेन की सुरक्षा और उसे आश्वस्त करने से संबंधित वार्ताओं में प्रगति के संकेत दिए थे।
विटकॉफ ने 31 दिसंबर को एक पोस्ट में कहा कि उनके, रुबियो और कुशनर (अमेरिकी पक्ष से) तथा दूसरी ओर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ हुई ‘सार्थक’ चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ‘सुरक्षा गारंटी को मजबूत करना और युद्ध को समाप्त करने तथा इसे दोबारा शुरू न होने देने के लिए प्रभावी समाधान तंत्र विकसित करना’ था।
ब्रिटेन के साथ मिलकर महीनों से जारी बहुराष्ट्रीय युद्धविराम प्रयासों का समन्वय करने वाले फ्रांस ने योजना के दायरे के बारे में केवल संक्षिप्त जानकारी दी है। उसका कहना है कि रूस द्वारा युद्ध दोबारा शुरू करने की स्थिति में यूक्रेन की रक्षा की पहली पंक्ति यूक्रेनी सेना होगी और गठबधन का इरादा प्रशिक्षण, हथियार और अन्य सहायता प्रदान करके इसे मजबूत करना है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सप्ताहांत में कहा था कि संभावित यूरोपीय सैन्य तैनाती में अब भी कई बाधाएं हैं, अहम चीजों पर अभी निर्णय नहीं हुआ है और ‘हर कोई’ सेना भेजने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के मसले पर कई देशों को संसद की मंजूरी लेनी होगी भले ही उनके नेता यूक्रेन को सैन्य समर्थन देने पर सहमत हों। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि सहायता सैनिकों के अलावा अन्य रूपों में भी दी जा सकती है, जैसे ‘हथियारों, प्रौद्योगिकी और खुफिया जानकारी के माध्यम से’।
जेलेंस्की ने कहा कि पश्चिमी यूरोप के परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों (ब्रिटेन और फ्रांस) द्वारा यूक्रेन में युद्धविराम के बाद तैनाती ‘आवश्यक’ होगी क्योंकि गठबंधन के कुछ अन्य सदस्य ‘सैनिकों के रूप में सैन्य सहायता प्रदान नहीं कर सकते हैं’, लेकिन वे प्रतिबंधों, वित्तीय सहायता, मानवीय सहायता आदि के माध्यम से समर्थन प्रदान करते हैं।
एपी संतोष अविनाश
अविनाश