अमेरिका, ईरान ने पश्चिम एशिया में एक-दूसरे पर हमले तेज किए, खतरे में पड़ा युद्ध विराम समझौता

अमेरिका, ईरान ने पश्चिम एशिया में एक-दूसरे पर हमले तेज किए, खतरे में पड़ा युद्ध विराम समझौता

अमेरिका, ईरान ने पश्चिम एशिया में एक-दूसरे पर हमले तेज किए, खतरे में पड़ा युद्ध विराम समझौता
Modified Date: July 9, 2026 / 07:14 pm IST
Published Date: July 9, 2026 7:14 pm IST

दुबई, नौ जुलाई (एपी) अमेरिका ने बृहस्पतिवार तड़के ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने उसके सहयोगी पश्चिम एशियाई देशों को निशाना बनाया। दोनों तरफ से हुए हमलों के कारण वह अस्थायी समझौता खतरा में पड़ गया है, जिसका मकसद पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने में मदद करना था।

बुधवार को भी दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमले किए थे, लेकिन बृहस्पतिवार के हमले पहले से ज्यादा बड़े थे। बहरीन में कम से कम तीन बार सायरन बजे। कुवैत और कतर पर भी मिसाइलें दागी गईं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है।

बृहस्पतिवार दोपहर जॉर्डन में भी सायरन बजे, जहां अमेरिका ने अपने सैनिक और विमान तैनात रखे हैं।

ईरान के एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवार को अमेरिका ने ईरान के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास हवाई हमला किया और दोपहर में देश के दूसरे हिस्सों से भी विस्फोटों की खबरें आईं।

ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के कुछ घंटे बाद हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरान के हालिया हमले युद्धविराम के खत्म होने का संकेत हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ये हमले नहीं रुके तो संघर्ष और बढ़ सकता है।

इसके बाद पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध की चपेट में आने की आशंका बढ़ गई। ऐसा होने पर कई देश प्रभावित होंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति भी रुक सकती है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पिछले दो दिन में अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और 78 लोग घायल हुए हैं। इनमें ज्यादातर सुरक्षा बलों के सदस्य बताए गए हैं।

कुवैत की सेना ने कहा कि उसने तीन बैलिस्टिक मिसाइलें, एक क्रूज मिसाइल और 10 ड्रोन मार गिराए। बहरीन ने कहा कि उसने भी हमलों को रोका है। कतर में नुकसान के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिली।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान में करीब 90 ठिकानों पर हमला किया। कमांड ने हवाई अड्डे के रनवे और मिसाइल लॉन्चर पर हमलों के कुछ वीडियो साझा किए।

अमेरिका ने कहा कि इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।

युद्ध के दौरान जहाजों पर हुए हमलों और उनके खतरे की वजह से होर्मुज जलडमरुमध्य पर आवाजाही लगभग रुक गई थी। इससे तेल की कीमतें बहुत बढ़ गईं और खाद्य पदार्थों समेत कई जरूरी सामान महंगे हो गए।

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि बुशेहर और दक्षिणी बंदरगाह शहरों समेत कई जगहों पर विस्फोट हुए। बुशेहर में ईरान का परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।

सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत में बृहस्पतिवार को कम से कम तीन लोगों की मौत हुई। ईरानशहर में एक हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक अग्निशमनकर्मी की मौत हो गई। इससे पहले बुधवार के हमलों में ईरान के सुरक्षा बलों के कम से कम नौ सदस्य मारे गए थे।

अप्रैल के बाद पहली बार अमेरिका ने ईरान के पुलों को भी निशाना बनाया। सरकारी मीडिया ने उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में एक रेलवे पुल पर हमले की खबर दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि मशहद जाने वाले रास्ते के दो पुलों पर भी हमला हुआ। मशहद में बृहस्पतिवार को दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई को दफनाया जाना है।

इस बीच, सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बुशेहर के स्थानीय अधिकारी एहसान जहानियान के हवाले से कहा कि अमेरिका ने बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास हमला किया।

उन्होंने कहा कि हमला दोपहर के आसपास हुआ, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड कुछ घंटे पहले ही कह चुकी थी कि उसने ईरान पर हमले रोक दिए हैं। सेंट्रल कमांड ने ईरानी अधिकारी के दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

तुर्किये में नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेकर लौटने के बाद ट्रंप ने ईरान में हुए विस्फोटों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और ईरान को फिर चेतावनी दी।

उन्होंने लिखा, “यह हमला ईरान द्वारा कल जहाजों पर किए गए हमले का जवाब है। अगर ऐसा फिर हुआ तो हालात और ज्यादा खराब होंगे।”

ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि दोनों पक्षों के बीच हालिया लड़ाई लंबे समय तक नहीं चलेगी।

उन्होंने कहा, “जो भी होगा, बहुत जल्दी होगा।”

ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों, समुद्र के पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों और खर्ग द्वीप पर हमला करने की चेतावनी भी दोहराई। ईरान से लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात खर्ग द्वीप के माध्यम से होता है।

दोनों पक्षों के बीच यह नया संघर्ष तब शुरू हुआ जब ईरान ने मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमला किया।

युद्धविराम के बावजूद हुए इन नए हमलों से यह संकेत मिल सकता है कि ईरान के नेतृत्व में मतभेद हैं।

कट्टरपंथी नेता इस होर्मुज जलडमरुमध्य पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। यह मार्ग दुनिया में ईंधन की आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और पश्चिमी देशों के खिलाफ दबाव बनाने का एक बड़ा साधन भी है।

वहीं, दूसरे नेता स्थायी शांति समझौता चाहते हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटें और देश की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।

स्थायी शांति समझौते की बातचीत में प्रमुख भूमिका निभा रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बृहस्पतिवार सुबह ‘एक्स’ पर लिखा, “अमेरिका अब भी नहीं समझा है कि धमकी और वादाखिलाफी की कीमत चुकानी पड़ेगी। साफ शब्दों में कहूं तो अगर आप हमला करेंगे, तो जवाब भी मिलेगा।”

ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि लड़ाई रोकने के लिए हुआ अस्थायी समझौता अब खत्म हो चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह बातचीत जारी रहने देंगे, लेकिन उसके सफल होने पर उन्हें संदेह है।

उन्होंने कहा, “वे बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।”

बातचीत में शामिल प्रमुख नेताओं में से एक ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ‘एक्स’ पर जवाब दिया कि ट्रंप की टिप्पणी ताकत की नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीति की विफलता की स्वीकारोक्ति है।

स्थायी समझौते के लिए बातचीत अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद शुरू होनी थी। फरवरी में युद्ध की शुरुआत में उनकी मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है और इस दौरान तनाव कम रहने की उम्मीद थी।

एपी जोहेब अविनाश

अविनाश


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