अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हवाई हमले किए, ईरान की खाड़ी देशों और जॉर्डन में जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हवाई हमले किए, ईरान की खाड़ी देशों और जॉर्डन में जवाबी कार्रवाई
दुबई, 11 जून (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को बातचीत रोकने के लिए ‘‘कीमत चुकाने’’ की धमकी दिए जाने के बाद अमेरिका ने बृहस्पतिवार सुबह तेहरान पर नए सिरे से हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर हमले किए।
ईरान के कई शहरों में हुए इन नए हमलों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की कोशिश फिर से ठप पड़ती दिखाई दी। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है।
अमेरिकी हमला पिछले दिन की तुलना में अधिक भीषण और व्यापक प्रतीत हुआ, लेकिन ईरान ने नुकसान के बारे में बहुत कम जानकारी जारी की।
कुवैत ने बृहस्पतिवार सुबह हुए हमले के कारण कई घंटों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, हालांकि उसने किसी नुकसान के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।
वहीं, जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान द्वारा दागी गई 20 मिसाइलों को मार गिराया, जिनका निशाना वह क्षेत्र था जहां अमेरिकी सैनिकों वाला एक वायुसेना अड्डा स्थित है। इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ।
बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमले के जवाब में की गई कार्रवाई के दौरान गिरे मलबे से 11 वर्षीय एक लड़की घायल हो गई, जबकि कई कारों और मकानों को भी नुकसान पहुंचा।
यह इस सप्ताह तीसरी बार था जब दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों ने दो महीने पुराने युद्धविराम की परीक्षा ली।
ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है और इस सप्ताह की शुरुआत में संकेत दिया था कि कुछ ही दिनों में समझौता हो सकता है।
भारी बमबारी के बावजूद ईरान ने अपनी मजबूती दिखाई है। उसका मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने की उसकी क्षमता उसे सौदेबाजी करने का रास्ता देती है। यह जलडमरूमध्य तेल और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
इसके बावजूद दोनों देश संघर्ष समाप्त करने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं और इसे अपने-अपने देशों में राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना चाहते हैं।
वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के पक्षधर दिखाई देते हैं, जिनसे समझौता और कठिन हो सकता है। इनमें ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार का पतन, उसके परमाणु कार्यक्रम का अंत और लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला का विनाश शामिल है। सोमवार को ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर हमले किए थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान में बृहस्पतिवार को सूर्योदय से ठीक पहले अपने ताजा हवाई हमलों का दौर ‘‘पूरा’’ कर लिया। कमांड के अनुसार, ये हमले ‘‘ईरान की अनुचित और लगातार आक्रामकता के जवाब में’’ किए गए तथा इनमें ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों तथा वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हमलों से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। बताया गया कि यह कार्रवाई अमेरिकी वायुसेना, मरीन कोर और नौसेना ने मिलकर की।
इन हमलों के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के दक्षिणी इलाकों में विस्फोटों की आवाज गूंजती रही।
इजराइल ने भी बृहस्पतिवार तड़के उत्तरी क्षेत्रों के निवासियों को संभावित हमले की आशंका के चलते सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी।
अमेरिकी सेना ने बुधवार को कहा कि उसने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी सेटेबेलो के इंजन कक्ष पर सटीक हथियारों से हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज ईरानी तेल लेकर नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई से निष्क्रिय किया गया आठवां व्यापारी जहाज था।
नवंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित ट्रंप शीघ्र समाधान चाहते हैं, लेकिन उनकी कुछ मांगें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार करना ईरान के लिए कठिन होगा।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ दे।
ईरान इस यूरेनियम को छोड़ने से इनकार कर रहा है और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। साथ ही वह अंतिम समझौते से पहले ही अपनी कुर्क विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की भी मांग कर रहा है, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया है।
अमेरिका के साथ समन्वय कर वार्ता में जुटे कतर का एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल बातचीत करने के बाद बृहस्पतिवार सुबह तेहरान से रवाना हो गया।
एपी
गोला नेत्रपाल
नेत्रपाल

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