वाशिंगटन, नौ जुलाई (भाषा) अमेरिका ने एच-1बी और ‘परम’ (पीईआरएम) कार्य वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों की जांच शुरू कर दी है।
संघीय श्रम विभाग के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी कॉग्निजेंट भी शामिल है।
अमेरिकी श्रम विभाग के तहत आने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (ओआईजी) ने एक बयान में कहा कि जांच में ऐसे व्यापक तौर-तरीकों का पता चला है, जिनमें नियोक्ताओं और श्रम दलालों ने कथित रूप से फर्जी आवेदन दाखिल किए, विदेशी कामगारों का वेतन वापस लेने जैसी जबरन व्यवस्थाओं के जरिए उनका शोषण किया तथा कम वेतन वाले श्रमिकों की अधिक संख्या लाकर अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाया।
श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पोसिटो ने ‘फॉक्स बिजनेस’ से कहा, ‘‘हम पहले ही दर्जनों समन जारी कर चुके हैं और हर सुराग तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। हमें मुखबिरों से ऐसी जानकारी मिल रही है, जिनमें कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों का भी उल्लेख है। इन कंपनियों का नाम पीईआरएम और एच-1बी वीजा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में सामने आया है।’’
यह कार्रवाई उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के नेतृत्व में गठित ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत की गई है।
ओआईजी के बयान में कहा गया है कि इस तरह की कथित अनियमितताएं श्रम विभाग की उन योजनाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक श्रम कमी को दूर करना है, न कि अमेरिकी नौकरियों की कीमत पर गलत तरीके अपनाने वाले लोगों को लाभ पहुंचाना।
भाषा मनीषा रंजन
रंजन