अनुभवी राजनेता इसाक हर्जोग बने इजराइल के 11वें राष्ट्रपति

अनुभवी राजनेता इसाक हर्जोग बने इजराइल के 11वें राष्ट्रपति

अनुभवी राजनेता इसाक हर्जोग बने इजराइल के 11वें राष्ट्रपति
Modified Date: November 29, 2022 / 08:57 pm IST
Published Date: June 2, 2021 11:33 am IST

यरुशलम, दो जून (भाषा) इजराइली संसद ‘नेसेट’ में हुए गुप्त मतदान में अनुभवी नेता इसाक हर्जोग को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित किया गया है।

लेबर पार्टी के पूर्व नेता 60 वर्षीय हर्जोग देश के पहले राष्ट्रपति होंगे जो पूर्व राष्ट्रपति के बेटे हैं। उनके पिता सियाम हर्जोग वर्ष 1983 से 1993 तक इजराइल के राष्ट्राध्यक्ष थे।

हर्जोग को 120 सदस्यीय संसद में 87 मत मिले और उन्होंने आसानी से अपनी प्रतिद्वंद्वी मिरियम परेत्ज को हरा दिया।

वह आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति रियूवन रिवलिन का स्थान लेंगे जो सात साल के कार्यकाल के बाद नौ जुलाई को कार्यभार छोड़ेंगे।

हर्जोग ने उनका समर्थन करने वाले सांसदों को धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि इजराइल के सभी लोगों की सेवा करना सम्मान की बात है।

हर्जोग ने कहा, ‘‘मैं सभी देशवासियों का राष्ट्रपति रहूंगा।’’

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने हर्जोग को देश का अगला राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं सभी इजराइली नागरिकों की ओर से शुभकामनाएं देता हूं।’’

उल्लेखनीय है कि हर्जोग वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री पद के लिए नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी थे।

हर्जोग मौजूदा समय में यहूदी एजेंसी के प्रमुख की भूमिका निभा रहे हैं। यह एजेंसी गैर लाभकारी संस्था है जो सरकार के साथ इजराइल में आव्रजन को प्रोत्साहित करने के लिए काम करती है। वह वर्ष 2003 से 2018 तक नेसेट के सदस्य रहे और कई मंत्रालयों का कार्यभार बतौर मंत्री संभाला।

उनके दादा रब्बी यित्जक हालेवी हर्जोग एक दशक से ज्यादा समय तक आयरलैंड के पहले प्रधान रब्बी (यहूदी धार्मिक नेता)रहे और इसके बाद वर्ष 1936 से 1959 तक ब्रिटिश मेंडेट्री फलस्तीन के प्रधान रब्बी की भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हर्जोग ने अपने राजीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 1999-200 में प्रधानमंत्री एहुद बराक के कैबिनेट सचिव के तौर पर की।

हर्जोग की प्रतिद्वंद्वी परेत्ज सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनके दो बेटों ने युद्ध में शहादत दी है। इस व्यक्तिगत क्षति से इतर वह पुरस्कार विजेता शिक्षक और यहूदी धर्म से जुड़े मामलों की वक्ता हैं। उन्हें केवल 27 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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