भारतीय राजदूत का मंदारिन भाषा में धाराप्रवाह बोलते हुए वीडियो चीन में वायरल

भारतीय राजदूत का मंदारिन भाषा में धाराप्रवाह बोलते हुए वीडियो चीन में वायरल

भारतीय राजदूत का मंदारिन भाषा में धाराप्रवाह बोलते हुए वीडियो चीन में वायरल
Modified Date: May 31, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: May 31, 2026 9:32 pm IST

बीजिंग, 31 मई (भाषा) चीन में भारत के नए राजदूत विक्रम दोरईस्वामी का एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वह धाराप्रवाह मंदारिन भाषा में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को उजागर करते हुए आगंतुकों को यहां भारतीय दूतावास का दौरा करा रहे हैं।

दोरईस्वामी (56) चीन में तब से लोकप्रिय हो गए हैं जब नयी दिल्ली ने इस साल मार्च में उन्हें नया राजदूत नियुक्त किया था, क्योंकि चीनी विदेश मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का स्वागत करते हुए उनके चीनी नाम पर प्रकाश डाला था।

मार्च में यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “मैंने देखा कि राजदूत दोरईस्वामी ने अपने लिए एक चीनी नाम चुना है: वेई जियामेंग।”

उनके चीनी नाम का अर्थ है “उत्कृष्ट गठबंधन बनाने वाला”, जिसने चीनी आधिकारिक और सोशल मीडिया में सकारात्मक चर्चा पैदा की।

रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा के बगल में खड़े होकर, दोरईस्वामी ने एक सदी से भी अधिक समय पहले चीन में टैगोर की यात्राओं को याद किया, जिनके दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता ने एशियाई संस्कृति और लोगों के जागरण का आह्वान किया था।

राजदूत ने कहा कि टैगोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन विश्व की प्राचीन सभ्यताओं के घर हैं, जिनमें विशिष्ट और विविध संस्कृतियां, संगीत, रंगमंच, ललित कलाएं और व्यंजन मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि ये दोनों दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं जो संस्कृति के मामले में बहुत ही अनोखे हैं, और उन्होंने चीनी नागरिकों को दूतावास के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

उनके वीडियो को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और अधिकांश इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने ई-वीज़ा सुविधाओं को बहाल करने की मांग की।

एक व्यक्ति ने कहा, “हम चीन और भारत के बीच अटूट मित्रता चाहते हैं और राजदूत को उनके काम में हर संभव सफलता की कामना करते हैं।”

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए वीजा प्रक्रियाओं को और आसान बना सकता है।”

दोरईस्वामी इससे पहले लंदन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत थे।

मंदारिन भाषा बोलने वाले दोरईस्वामी ने अपने प्रारंभिक राजनयिक करियर में हांगकांग और बीजिंग दोनों के राजनयिक मिशनों में अपनी सेवाएं दी हैं।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश


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