संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (एपी) ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को कहा कि उनके लोग अमेरिका के हाथों “आतंकवाद से पीड़ित” हैं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में युद्धकाल के दौरान भाषण दिया, जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक दिन पहले दिए गए उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह इस्लामी गणराज्य को ‘‘खत्म’’ कर सकते हैं।
युद्धकाल के दौरान दिए गए दुर्लभ भाषण में पेजेश्कियान ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए 150 से अधिक स्कूली बच्चों की तस्वीरें दिखाईं।
महासभा में पेजेश्कियान ने कहा, “हमने केवल अपना बचाव किया है। हम आतंकवादी नहीं हैं। हमारे निर्दोष लोगों को हमारे देश पर किए गए कायरतापूर्ण हमलों और आक्रमणों का निशाना बनाया गया। हमने पूरी ताकत के साथ अपना बचाव किया। अमेरिका और इजराइल ने हम पर हमला किया।”
अमेरिका के बारे में उन्होंने कहा, “हां, उन्होंने हम पर हमला किया, लेकिन हम झुके नहीं।”
अपने भाषण के अंत में पेजेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति का नाम लेते हुए कहा, “ट्रंप और उन लोगों को यह समझना चाहिए जो हमें धमकाने की कोशिश करते हैं कि हम ताकत के इस्तेमाल की भाषा स्वीकार किए बिना बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “हमने आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया।” हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार यह दावा गलत है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के हमलों में क्षेत्र के नाविकों और प्रवासी श्रमिकों समेत कई आम नागरिक मारे गए हैं।
भारी सुरक्षा और निगरानी के बीच न्यूयॉर्क पहुंचे पेजेश्कियान ने विश्व नेताओं को संबोधित किया। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में उन्हें एक उदारवादी नेता माना जाता है। उनका भाषण ट्रंप के उसी मंच पर दिए गए बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने करीब सात महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए जल्द समझौता नहीं होने पर ईरान को “तबाह” करने की बात कही थी।
कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने संवाददाताओं को बताया कि उनके मुख्य दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने वार्षिक बैठक के दौरान ईरानी अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे तक वार्ता की। लेकिन उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी कि उस दौरान क्या चर्चा हुई।
ट्रंप ने कहा, ‘‘यह बहुत अच्छी बैठक थी।’’ राष्ट्रपति ने बाद में कहा कि ईरानी अधिकारी ‘‘शीर्ष स्तर के नहीं थे…।’’ साथ ही, मंगलवार को विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि न्यूयॉर्क में ठहरने के दौरान ट्रंप, पेजेश्कियान से मिलने के लिए तैयार हैं।
वहीं, तेहरान ने मंगलवार को हुई अनियोजित बैठक को तवज्जो नहीं दी, जो जून में हुए युद्धविराम के टूटने के बाद अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच पहली अप्रत्यक्ष वार्ता थी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत में, तेहरान के रुख को बरकरार रखते हुए मांग की कि वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करे और कुर्क की गई ईरानी परिसंपत्तियों को मुक्त करे।
बघई ने कहा कि कतर के मध्यस्थों के जरिए हुई यह बातचीत “कुछ नयी चीज नहीं” थी।
पेजेश्कियान के भाषण में यह बताया गया कि एक साल से अधिक समय से जारी बातचीत के बावजूद दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। उनका भाषण ऐसे समय आया, जब ईरान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में रुक-रुक कर हमले जारी रहे और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर से कम रही।
उन्होंने कहा कि जून में उनके देश पर “बर्बर हमला” हुआ और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन किया गया।
एपी
अमित अविनाश
अविनाश