(के जे एम वर्मा)
बीजिंग, 23 सितंबर (भाषा) चीन की सेना के मुखपत्र ने बुधवार को कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दो शीर्ष जनरलों को निष्कासित करने से सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी और सेना के लिए ‘‘छिपे हुए बड़े राजनीतिक खतरे’’ को समाप्त कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों अधिकारियों ने संभवत: सेना पर पार्टी के नियंत्रण को चुनौती दी थी।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने सोमवार को पीएलए के दो शीर्ष अधिकारियों जनरल झांग यूशिया और लियू झेनली को गंभीर अनुशासनहीनता और कानून के उल्लंघन के आरोपों में पार्टी और सेना से निष्कासित कर दिया था।
चीनी सेना के मुखपत्र ‘पीएलए डेली’ ने बुधवार को अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित संपादकीय में झांग और लियू का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘दोनों के खिलाफ जांच और सजा से पार्टी और सेना के लिए छिपे हुए एक बड़े राजनीतिक खतरे को खत्म कर दिया गया है तथा यह सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से चल रही व्यापक लड़ाई में बड़ी जीत है।’’
संपादकीय में कहा गया कि दोनों अधिकारियों को हटाने से सेना की ‘‘शुद्धता और सम्मान’’ को बढ़ावा मिलेगा तथा वह अपने मिशन और जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम होगी।
हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के अनुसार, संपादकीय में कहा गया कि पीएलए ने ‘‘गहरे पैठे जहरीले प्रभावों और जमा हुई बुराइयों को पूरी तरह उजागर किया है और अंदर से बाहर तक खुद को मजबूत बनाने की प्रक्रिया से गुजरी है’’, जिससे ‘‘सैनिकों का मनोबल और भावना लगातार बेहतर हुई है।’’
संपादकीय में कहा गया कि ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्थिति, राष्ट्रीय परिस्थितियां और पार्टी तथा सेना से जुड़ी स्थितियां जटिल और गहरे बदलावों से गुजर रही हैं।’’ इसलिए ‘‘हमें पार्टी केंद्रीय समिति और केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के फैसलों तथा व्यवस्थाओं के साथ अपनी सोच और कार्यों को एकजुट करना होगा।’’
सीएमसी पीएलए की सर्वोच्च कमान है, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति शी चिनफिंग करते हैं।
झांग यूशिया (75) सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और सीएमसी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि 61 वर्षीय लियू झेनली सीएमसी के सदस्य और सीएमसी के संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रमुख रह चुके हैं।
झांग सीपीसी के 24 सदस्यीय पोलित ब्यूरो के सदस्य भी थे, जो पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था है।
दोनों अधिकारी युद्ध में भाग लेने वाले अनुभवी और सम्मानित सैन्य अधिकारी रहे हैं तथा वे सीएमसी के एकमात्र ऐसे सदस्य थे जिन्हें वास्तविक युद्ध का अनुभव था। दोनों ने 1970 के दशक के अंत में वियतनाम के खिलाफ पीएलए के अभियानों में हिस्सा लिया था।
विशेष रूप से सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी झांग को हटाए जाने से चीन के सैन्य प्रतिष्ठान में हलचल मच गई है।
वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी चिनफिंग सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि देश की सेना को सीपीसी के नेतृत्व में काम करना चाहिए और उसकी नीतियों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
शी द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत पीएलए के दर्जनों वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया या उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। आलोचकों का कहना है कि इस अभियान से शी की सत्ता पर पकड़ मजबूत हुई है।
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश