प्रतिरक्षा अत्यधिक मजबूत होने पर भी संक्रमण के प्रति संवेदनशील क्यों होते हैं लूपस से पीड़ित लोग

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प्रतिरक्षा अत्यधिक मजबूत होने पर भी संक्रमण के प्रति संवेदनशील क्यों होते हैं लूपस से पीड़ित लोग

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  • Publish Date - September 21, 2026 / 04:17 PM IST,
    Updated On - September 21, 2026 / 04:17 PM IST

(एंड्रयू मोंटीथ, टेनेसी विश्वविद्यालय)

नॉक्सविले (अमेरिका), 21 सितंबर (द कन्वरसेशन) लूपस बीमारी से पीड़ित लोगों को अत्यधिक सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली होने के बावजूद जीवाणु संक्रमण से निजात पाने में समस्या पेश आ सकती है। मेरी टीम और मैंने पाया कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पुरानी और निरंतर रहने वाली सूजन ऐसे लोगों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को भ्रमित कर देती है।

एक अत्यधिक सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली जीवाणु संक्रमण को नियंत्रित करने में विफल क्यों हो सकती है, इसे समझने के लिए हमने न्यूट्रोफिल पर ध्यान केंद्रित किया। न्यूट्रोफिल ऐसी सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं जो शरीर में जीवाणु के प्रवेश करने पर सबसे पहले प्रतिक्रिया करती हैं।

न्यूट्रोफिल डीएनए और रोगाणुरोधी प्रोटीन छोड़ सकते हैं, जिन्हें न्यूट्रोफिल एक्स्ट्रासेलुलर ट्रैप या ‘नेट्स’ कहा जाता है। ये नेट्स जीवाणु (बैक्टीरिया) को जकड़कर उनके फैलाव को सीमित कर सकते हैं और उन्हें मार सकते हैं।

वैज्ञानिक अक्सर इन ट्रैप को एक समान मानते हैं, लेकिन शरीर अलग-अलग तरीकों से नेट्स बना सकता है, और वे सभी एक समान रूप से प्रभावी नहीं होते।

उदाहरण के लिए, ‘स्टैफिलोकोकस ऑरियस’ नामक बैक्टीरिया शरीर पर हमला करता है तो लैक्टेट नाम का एक रसायन छोड़ता है। इसके बाद न्यूट्रोफिल एक जाल बनाता है, जो जीवाणुरोधी प्रोटीन से भरपूर होता है। हालांकि यह जीवाणुरोधी प्रोटीन बैक्टीरिया के साथ साथ न्यूट्रोफिल को मार भी देता है।

चूहों पर किए गए अध्ययन में मेरी टीम और मैंने पाया कि लूपस बीमारी में शरीर में सूजन पैदा करने वाले अणु बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं। ये अणु उस प्रोटीन की मात्रा कम कर देते हैं, जो बैक्टीरिया से बनने वाले लैक्टेट को पहचानने के लिए जरूरी होता है।

इसी समय, सूजन पैदा करने वाला एक अन्य अणु न्यूट्रोफिल को एक अलग प्रकार का जाल बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिसे वह जल्दी छोड़ सकता है। इससे न्यूट्रोफिल को नुकसान तो कम होता है, लेकिन बैक्टीरिया को नष्ट करने की उसकी क्षमता भी कम हो जाती है।

इसका अर्थ है कि प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर नहीं बल्कि अत्यधिक सक्रिय है, लेकिन वह भ्रमित है।

लूपस को आमतौर पर एक ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी के रूप में वर्णित किया जाता है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने ही ऊतकों पर हमला करती है। लेकिन लूपस से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर संक्रमण भी एक बड़ी चिंता का विषय हैं। उस जोखिम का कुछ हिस्सा उन दवाओं से आता है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती हैं।

हमारे निष्कर्ष यह समझने में मदद करते हैं कि शरीर में ज्यादा सूजन होने का मतलब यह नहीं है कि संक्रमण से बचाव भी बेहतर होगा। संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया किस प्रकार की है और वह कब सक्रिय होती है, यह बहुत महत्वपूर्ण होता है।

मेरी टीम और मैं अब यह समझने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि विभिन्न प्रकार के नेट्स ऑटोइम्यून बीमारी और संक्रमण को कैसे प्रभावित करते हैं। सभी नेट्स को एक ही प्रतिक्रिया के रूप में देखने के बजाय, हम यह बताना चाहते हैं कि विभिन्न नेट्स कैसे उत्पन्न होते हैं, उनमें क्या होता है और क्या विशेष प्रकार के नेट्स अलग-अलग संदर्भों में सुरक्षात्मक या हानिकारक हैं।

(द कन्वरसेशन) जोहेब सुभाष

सुभाष