UGC Act 2026: यूजीसी के नए नियम से सवर्णों में आक्रोश, यूजीसी रूल्स के सेक्शन 3 (C) में ऐसा क्या? जानें

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UGC Act 2026 : इसके तहत प्रावधान बताए गए हैं कि हर संस्थान में समान अवसर आयोगों का गठन किया जाए। (UGC Act 2026) जिसके तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से भेदभाव को रोकने की बात कही गई है।

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 04:44 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 04:48 PM IST

UGC Act 2026, image source: instagram

HIGHLIGHTS
  • सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई प्रावधान नहीं
  • झूठी शिकायत पर ऐक्शन का प्रावधान नहीं
  • एससी, एसटी और ओबीसी को भेदभाव से बचाने का रास्ता साफ

नई दिल्ली: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी रूल्स 2026 को 15 जनवरी से लागू कर दिया गया है। जाहिर है कि इसे देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किया गया है। इसके तहत प्रावधान बताए गए हैं कि हर संस्थान में समान अवसर आयोगों का गठन किया जाए। (UGC Act 2026) जिसके तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से भेदभाव को रोकने की बात कही गई है।

इन रूल्स के सेक्शन 3 (C) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा बताई गई है। (UGC Act 2026)  इसमें लिखा गया है- ‘जाति-आधारित भेदभाव’ का अर्थ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव है।’ इसी बात को लेकर सर्वणों द्वारा आपत्ति जताई जा रही है।

सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई प्रावधान नहीं

वहीं इस मामले में सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों का मानना है कि इन नियमों से यूजीसी ने एससी, एसटी और ओबीसी को तो किसी भी तरह के भेदभाव से बचाने का रास्ता साफ किया है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। (UGC Act 2026)  इसके अतिरिक्त आपत्ति इस बात पर भी है कि यदि शिकायत गलत पाई जाती है तो फिर झूठी रिपोर्ट करने वाले के खिलाफ किसी तरह के ऐक्शन का प्रावधान नहीं है।

ऐसे में चिंता जाहिर की जा रही है कि यदि झूठी शिकायत पर ऐक्शन का प्रावधान नहीं होगा तो झूठी शिकायतों के मामलों में तो बाढ़ आ जाएगी, इन नियमों में झूठी शिकायतों पर एक्शन का प्रावधान रहना चाहिए अन्यथा यह तो सामान्य वर्ग के छात्रों को परेशान करने का बड़ा उपकरण बन जाएगा।

संस्थानों को समान अवसर केंद्र का करना होगा गठन

इस नए नियम के तहत सभी संस्थानों को समान अवसर केंद्र का गठन करना होगा। (UGC Act 2026)  इसके अलावा एक समता हेल्पलाइन भी बनानी होगी, जिस पर कभी भी कोई शिकायत कर सकता है। इसके अलावा जांच कमेटी गठित करने और यदि संज्ञेय अपराध हो तो पुलिस तक को मामला सौंपे जाने का प्रावधान तो रखा गया है। इस बात को लेकर भी आपत्ति है कि आखिर विश्वविद्यालय कैंपसों में पुलिस की एंट्री कैसे हो सकती है?

(UGC Act 2026) यहां सेक्शन (E) को पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। इसमें भेदभाव की परिभाषा दी गई है।

यूजीसी रूल्स में भेदभाव की परिभाषा क्या?

इस सेक्शन में लिखा गया है- ‘भेदभाव का अर्थ धर्म, नस्ल, जाति,लिंग, जन्म-स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी एक के आधार पर किसी भी हितधारक के विरुद्ध कोई भी अनुचित, भेदभावपूर्ण या पक्षपातपूर्ण व्यवहार या ऐसा कोई कार्य, चाहे वह स्पष्ट हो या अंतर्निहित हो। (UGC Ruls 2026) इसमें ऐसा कोई भी विभेद, वहिष्करण, प्रतिबंध या पक्षपात भी शामिल है जिसका उद्देश्य या प्रभाव शिक्षा में समान व्यवहार को निष्प्रभावी या अक्षम करना है और विशेष रूप से, किसी भी हितधारक या हितधारकों के समूह पर ऐसी शर्तें लगाना है जो मानवीय गरिमा के प्रतिकूल हों।’

सवर्णों को भेदभाव पर शिकायत का मौका देने की मांग

इसी बीच कुछ सवर्ण संगठनों की मांग यह भी है कि आखिर सामान्य वर्ग के लोगों को भी इस कानून के तहत संरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? इन लोगों की दलील है कि जैसे एससी, एसटी और ओबीसी के छात्र भेदभाव का शिकार हो सकते हैं, वैसे ही सवर्ण छात्र भी हो सकते हैं। (UGC Ruls 2026) ऐसे में उन्हें भी अपने खिलाफ होने वाले भेदभाव पर शिकायत करने का वैसा ही अधिकार मिलना चाहिए। (UGC Ruls 2026) इसके अतिरिक्त झूठी शिकायतों के मामले में शिकायत करने वाले के खिलाफ जुर्माने या अन्य कार्रवाई के प्रावधान की भी मांग रखी जा रही है। इस तरह जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर जो प्रावधान है, उस पर ही सवर्णों के एक वर्ग ने बड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

बहरहाल देखना होगा कि सरकार इन नियमों में संसोधन करके सवर्णों को भी भेदभाव पर सुरक्षा का प्रावधान करती है या नहीं। वरना सवर्णों की नाराजगी का असर आगामी यूपी चुनाव में साफ देखा जा सकता है।

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UGC Act 2026 कब लागू हुआ और कहाँ लागू होता है?

यह नियम 15 जनवरी 2026 से लागू किया गया है। देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे लागू किया गया है।

सेक्शन 3(C) में क्या प्रावधान है?

सेक्शन 3(C) में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा दी गई है। इसमें कहा गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के खिलाफ केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव को "जाति-आधारित भेदभाव" माना जाएगा।

सवर्ण समाज की आपत्ति क्यों है?

उनका कहना है कि नियमों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों को तो सुरक्षा दी गई है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई प्रावधान नहीं है।