UGC Equity Rule: यूजीसी के नए नियम पर बवाल, शिकायत से लेकर कार्रवाई तक, कैसे बनेगी कमेटी, कौन लेगा फैसला, जानिए पूरा प्रोसेस
UGC Equity Rule 2026 : क्या इन नियमों के तहत झूठी या फर्जी शिकायतों के जरिए निर्दोष लोगों को फंसाया जा सकता है? आइए समझते हैं कि यह नया इक्विटी रूल क्या है और शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी।
UGC Equity Rule 2026, image source: file image
- क्या है नए इक्विटी रूल का मकसद?
- हर संस्थान में बनाना होगा Equal Opportunity Center
- इक्विटी कमेटी में कौन-कौन होगा शामिल?
- बनेगा ‘इक्विटी स्क्वॉड’, तैनात होंगे इक्विटी एंबेस्डर
नई दिल्ली। यूजीसी के नए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव खत्म कर समानता को बढ़ावा देना बताया गया है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों पर सामान्य वर्ग के लोगों ने आपत्ति भी जताई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन नियमों के तहत झूठी या फर्जी शिकायतों के जरिए निर्दोष लोगों को फंसाया जा सकता है? आइए समझते हैं कि यह नया इक्विटी रूल क्या है और शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी।
क्या है नए इक्विटी रूल का मकसद?
यूजीसी के इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, दिव्यांगजन और अन्य वंचित समूहों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना इसका लक्ष्य है।
हर संस्थान में बनाना होगा Equal Opportunity Center
नए नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Center) स्थापित करना अनिवार्य होगा। संस्थान की गवर्निंग बॉडी या मैनेजिंग कमेटी इस केंद्र के लिए किसी स्थायी प्रोफेसर को को-ऑर्डिनेटर नियुक्त करेगी। इसी केंद्र के तहत एक इक्विटी कमेटी का गठन किया जाएगा।
इक्विटी कमेटी में कौन-कौन होगा शामिल?
इक्विटी कमेटी का गठन कॉलेज या यूनिवर्सिटी के प्रमुख द्वारा किया जाएगा। इसमें, संस्थान प्रमुख पदेन अध्यक्ष होंगे। तीन प्रोफेसर सदस्य होंगे। एक नॉन-टीचिंग स्टाफ का प्रतिनिधि होगा। सिविल सोसाइटी से प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले दो विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। दो छात्र प्रतिनिधि होंगे, जिनका चयन मेरिट या स्पोर्ट्स कोटे से हुआ हो। इक्विटी सेंटर का को-ऑर्डिनेटर समिति का सचिव होगा।
इस कमेटी में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है। समिति के सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का रहेगा। कम से कम दो बैठकें साल में करना जरूरी होगा।
बनेगा ‘इक्विटी स्क्वॉड’, तैनात होंगे इक्विटी एंबेस्डर
हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसर में छोटे स्तर पर इक्विटी स्क्वॉड बनाए जाएंगे। ये स्क्वॉड पूरे कैंपस में सक्रिय रहेंगे और किसी भी प्रकार के भेदभाव या असमान व्यवहार की सूचना इक्विटी सेंटर के को-ऑर्डिनेटर को देंगे।
संस्थान के अलग-अलग विभागों, संकायों, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य इकाइयों में इक्विटी एंबेस्डर (समता दूत) नियुक्त किए जाएंगे। ये अपने-अपने विभागों में समानता के नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे और सीधे इक्विटी सेंटर से संपर्क में रहेंगे।
24×7 इक्विटी हेल्पलाइन जरूरी
हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में इक्विटी हेल्पलाइन का संचालन अनिवार्य होगा, जो चौबीसों घंटे काम करेगी। यदि किसी कॉलेज की हेल्पलाइन अस्थायी रूप से बंद होती है, तो शिकायतकर्ता यूनिवर्सिटी की हेल्पलाइन से संपर्क कर सकेगा। शिकायतकर्ता चाहें तो अपनी पहचान गोपनीय रख सकते हैं।
शिकायत कैसे दर्ज होगी?
भेदभाव से पीड़ित कोई भी व्यक्ति, लिखित शिकायत, ई-मेल, ऑनलाइन पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि हेल्पलाइन पर दी गई सूचना गंभीर और तत्काल कार्रवाई योग्य हुई, तो मामला सीधे पुलिस को भी भेजा जा सकता है।
इक्विटी कमेटी कैसे करेगी कार्रवाई?
गंभीर शिकायत मिलने पर इक्विटी कमेटी को 24 घंटे के भीतर बैठक करनी होगी। यदि मामला किसी अन्य यूजीसी नियम के तहत आता है, तो उसे संबंधित कमेटी को भेजा जाएगा अन्य मामलों में इक्विटी कमेटी 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार कर संस्थान प्रमुख को सौंपेगी। रिपोर्ट की एक प्रति शिकायतकर्ता को भी दी जाएगी। संस्थान प्रमुख को रिपोर्ट मिलने के 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा, चाहे मामला प्रशासनिक हो या दंडनीय अपराध से जुड़ा हो।
अपील का भी मिलेगा मौका
यदि शिकायतकर्ता इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर लोकपाल के पास अपील कर सकता है। लोकपाल जरूरत पड़ने पर लीगल एडवाइजर या न्याय मित्र की नियुक्ति कर सकता है, जिसकी फीस संस्थान को देनी होगी। लोकपाल को 30 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास करना होगा।
यूजीसी करेगी राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी
नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर एक निगरानी समिति बनाएगा। इसमें सिविल सोसाइटी, प्रोफेशनल काउंसिल और विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज का दौरा कर रिपोर्ट यूजीसी और उच्च शिक्षा विभाग को सौंपेगी।
नियम नहीं माने तो क्या होगा?
यदि कोई विश्वविद्यालय या कॉलेज इन इक्विटी नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है या यूजीसी की फंडिंग रोकी जा सकती है।
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