पटना, तीन सितंबर (भाषा) बिहार सरकार ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के 19 जिलों में उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों को बिचौलियों से राहत मिलेगी।
सिन्हा ने कहा कि ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ अभियान के तहत एक सितंबर से डिजिटल उर्वरक बिक्री प्रणाली लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पूरी तरह किसान-केंद्रित बनाना है, ताकि उपलब्धता से लेकर बिक्री तक हर स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
मंत्री ने बताया, “कृषि विभाग ने एफएसएएस (फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है। आईएफएमएस और एग्रीस्टैक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है।”
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी किसान रजिस्ट्री में उपलब्ध है, उनके आवश्यक विवरण किसान पहचान-पत्र के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि अन्य किसान भी एफएसएएस पर पंजीकरण कर संबंधित खेत का खाता एवं खसरा संख्या, क्षेत्रफल तथा फसल का विवरण दर्ज कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरक की आवश्यकता की गणना की जाएगी और किसान को एक क्यूआर कोड जारी किया जाएगा।
सिन्हा ने बताया, “यह क्यूआर कोड तीन दिनों तक मान्य रहेगा। इसके माध्यम से किसान अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर उर्वरक खरीद सकेंगे।”
उन्होंने कहा, “नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, किसानों को किसान पहचान-पत्र, एफएसएएस पंजीकरण और डिजिटल खरीद प्रक्रिया की जानकारी तथा आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।”
सिन्हा ने बताया कि जिन 19 जिलों में डिजिटल उर्वरक बिक्री शुरू की गई है, उनमें पटना, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, सारण, सीवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और भागलपुर शामिल हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था की शुरुआत पायलट परियोजना के रूप में वैशाली और शेखपुरा जिलों में की गई थी।
उन्होंने कहा कि एक सितंबर से इसे 19 जिलों तक विस्तारित किया गया है, जबकि दो अक्टूबर से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
सिन्हा ने कहा कि इससे उर्वरक की उपलब्धता, भंडारण, वितरण और बिक्री की बेहतर निगरानी संभव होगी।
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