नव नालंदा महाविहार में प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव पालि एवं अन्य भाषा संकाय के डीन नियुक्त

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नव नालंदा महाविहार में प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव पालि एवं अन्य भाषा संकाय के डीन नियुक्त

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 09:39 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 09:39 PM IST

पटना/नालंदा, 11 मई (भाषा) वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’ को सोमवार को नव नालंदा महाविहार में पालि एवं अन्य भाषा संकाय का संकायाध्यक्ष (डीन) नियुक्त किया गया है।

महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने सोमवार को उनकी नियुक्ति के संबंध में आदेश जारी किए।

श्रीवास्तव वर्तमान में नव नालंदा महाविहार के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं और इससे पूर्व विभागाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने संस्थान में ‘प्रोवोस्ट ऑफ हॉस्टल्स’, मीडिया प्रभारी तथा जनसंपर्क प्रमुख जैसे कई प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया है।

वह हिंदी और भोजपुरी के प्रतिष्ठित साहित्यकार, संस्कृतिविद, आलोचक एवं संपादक के रूप में जाने जाते हैं। साहित्य, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और लोकचेतना पर उनका कार्य विशेष रूप से चर्चित रहा है।

हिंदी, भोजपुरी, मैथिली तथा भारतीय साहित्यिक परंपराओं पर उनके अध्ययन ने उन्हें समकालीन बौद्धिक जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई है।

भारत सरकार की ओर से उन्हें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रतिनिधित्व के लिए फिजी भेजा गया था। इसके अलावा वह हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार तथा मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

उनके कार्यकाल में अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और अकादमिक गतिविधियों को नयी गति मिली।

श्रीवास्तव की राष्ट्रीय पहचान ऐसे साहित्यकार के रूप में रही है, जिन्होंने अकादमिक गंभीरता और लोकसंवेदना को साथ लेकर काम किया है।

उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘अनुपस्थित दिनांक’, ‘कविता के मद्धिम आंच में’, ‘चारुता’, ‘आकांक्षा से अधिक सत्वर’, ‘धूसर कविता’, ‘संसद भवन की छत पर खड़ा होके’ और ‘एक नया विन्यास’ प्रमुख हैं। साहित्य में उन्होंने ‘सुगद्य’ नामक नयी विधा की शुरुआत भी की है।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें श्याम नारायण पाण्डेय सम्मान, द्विभागीश अनुवाद सम्मान, भगीरथ सम्मान तथा ‘माटी के लाल’ सम्मान सहित कई राष्ट्रीय एवं साहित्यिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

भाषा कैलाश खारी

खारी