सूदखोरों पर शिकंजा कसने और गुंडों से वसूली पर लगाम के लिए बिहार विधानसभा ने विधेयक पारित किया

सूदखोरों पर शिकंजा कसने और गुंडों से वसूली पर लगाम के लिए बिहार विधानसभा ने विधेयक पारित किया

सूदखोरों पर शिकंजा कसने और गुंडों से वसूली पर लगाम के लिए बिहार विधानसभा ने विधेयक पारित किया
Modified Date: February 26, 2026 / 08:18 pm IST
Published Date: February 26, 2026 8:18 pm IST

पटना, 26 फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा ने सूदखोरों पर शिकंजा कसने और जबरन वसूली पर रोक लगाने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार को ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक’ को पारित किया।

प्रस्तावित कानून के तहत सूद की मार से आत्महत्या के लिए मजबूर हुए लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे। इन विशेष अदालतों की अध्यक्षता प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी करेंगे।

विधेयक के अनुसार, सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (माइक्रो फाइनेंस कंपनियों) को बिहार में ऋण वितरण शुरू करने से पहले राज्य सरकार के वित्त विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

कानून में सांस्थिक वित्त निदेशक को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेने के बाद बिहार में कारोबार शुरू करने से पहले सांस्थिक वित्त निदेशक के पास पंजीकरण कराना होगा। दस्तावेजों की जांच के उपरांत 90 दिनों के भीतर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बिना पंजीकरण के राज्य में व्यवसाय शुरू करना आपराधिक कृत्य माना जाएगा।

विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य सूक्ष्म वित्त संस्थाओं और छोटे ऋण प्रदाताओं को विनियमित करना तथा अनैतिक वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से उचित ब्याज दरों के साथ पारदर्शी ऋण संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

स्वनियामक संगठन ‘सा-धन’ के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में देश में सर्वाधिक दो करोड़ दो लाख से अधिक ऋण खाते हैं। राज्य के लोगों पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का कुल 57,712 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। राज्य के पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिले माइक्रो फाइनेंस ऋण के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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