बिहार मंत्रिमंडल ने 27 प्रस्तावों को दी मंजूरी, शहरी क्षेत्रों में भी होगा भू-सर्वेक्षण

Ads

बिहार मंत्रिमंडल ने 27 प्रस्तावों को दी मंजूरी, शहरी क्षेत्रों में भी होगा भू-सर्वेक्षण

  •  
  • Publish Date - May 27, 2026 / 08:09 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 08:09 PM IST

पटना, 27 मई (भाषा) बिहार मंत्रिमंडल ने शहरी क्षेत्रों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराने, लोकहित परियोजनाओं के लिए रैयती भूमि खरीद नीति लागू करने, विधायकों एवं सरकारी कर्मियों को बेनकदी इलाज की सुविधा देने तथा छोटे एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों के लिए नई विनियमावली लागू करने समेत कुल 27 प्रस्तावों को बुधवार को मंजूरी दी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार ने ‘‘बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026’’ को स्वीकृति दी है, जिसके तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती और अन्य प्रकार की भूमि का नया खतियान और भू-नक्शा तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब शहरी क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा।

चौधरी ने कहा कि सर्वेक्षण कार्य में शत-प्रतिशत शुद्धता, पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसके तहत कुछ पुराने प्रावधानों में बदलाव, कुछ नए प्रावधानों को शामिल करने तथा अप्रासंगिक नियमों को हटाने का निर्णय लिया गया है तथा भू-सर्वेक्षण से जुड़े नए शब्दों की स्पष्ट परिभाषा भी तय की जाएगी ताकि भ्रम की स्थिति नहीं बने।

चौधरी ने कहा कि सरकार का मानना है कि इन बदलावों से नगर निकाय क्षेत्रों सहित पूरे राज्य में भू-सर्वेक्षण का कार्य अधिक आसान और तेज होगा तथा भूमि अभिलेखों को आधुनिक और अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने लोकहित की परियोजनाओं के लिए आपसी सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से ‘‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026’’ को भी मंजूरी दी।

उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत शहरी क्षेत्रों में भूमि का मूल्य बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर (एमवीआर), जो भी अधिक होगा, उसके दोगुने के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मूल्य बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर, जो भी अधिक होगी, उसके चार गुने के बराबर होगा।

चौधरी ने कहा कि इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी तथा खरीदी जाने वाली भूमि को स्टांप एवं पंजीयन शुल्क से भी मुक्त रखा जाएगा।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस बीच, बिहार सरकार ने विधानमंडल के वर्तमान एवं पूर्व सदस्यों, अखिल भारतीय सेवाओं के कार्यरत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों, राज्य सरकार के नियमित कर्मियों, पेंशनधारियों तथा उनके आश्रितों के लिए बेनकदी इलाज की सुविधा लागू करने का भी निर्णय लिया है।

सरकार के अनुसार, स्वास्थ्य योजना के तहत अब अंतर्वासी चिकित्सा (इनडोर उपचार) के लिए लाभार्थियों को अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज का तत्काल भुगतान नहीं करना होगा। इससे चिकित्सा प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी तथा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक राहत मिलेगी।

चौधरी ने कहा कि मंत्रिमंडल ने ‘‘बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) विनियमावली, 2026’’ को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत 40 बिस्तरों तक की क्षमता वाले छोटे और मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों को विनियमित किया जाएगा।

अभी तक राज्य में केवल 40 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों पर ‘‘बिहार राज्य नैदानिक स्थापन (पंजीकरण एवं विनियमन) नियमावली, 2013’’ लागू थी, जबकि छोटे अस्पतालों, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, दंत चिकित्सा क्लीनिक तथा जांच केंद्रों के लिए कोई स्पष्ट नियमावली नहीं थी।

अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में दायर मामलों पर पटना उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद निदेशक प्रमुख (नर्सिंग) स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी, जिसकी अनुशंसाओं के आधार पर नई विनियमावली तैयार की गई।

नई व्यवस्था के तहत राज्य एवं जिला स्तर पर पंजीकरण प्राधिकार गठित किए जाएंगे। राज्य स्तर पर पांच सदस्यीय परिषद बनाई जाएगी, जिसके पदेन अध्यक्ष स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अथवा अपर सचिव होंगे। जिला स्तर पर तीन सदस्यीय जिला पंजीकरण प्राधिकार का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी करेंगे।

नियमावली में स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, अपील, निरस्तीकरण, अभिलेख संधारण तथा नियम उल्लंघन पर दंड संबंधी प्रावधान शामिल किए गए हैं।

भाषा कैलाश

राजकुमार

राजकुमार