Manju Verma Arms Act Case: प्रदेश की पूर्व मंत्री और उनके पति को कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा, इस गंभीर मामले में दिए गए थे दोषी करार

Manju Verma Arms Act Case: कोर्ट ने आर्म्स एक्ट मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

Manju Verma Arms Act Case: प्रदेश की पूर्व मंत्री और उनके पति को कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा, इस गंभीर मामले में दिए गए थे दोषी करार

Manju Verma Arms Act Case/Image Credit: AI

Modified Date: August 1, 2026 / 10:50 pm IST
Published Date: August 1, 2026 10:47 pm IST
HIGHLIGHTS
  • अदालत ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
  • अदालत ने आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मामले में पूर्व मंत्री और उनके पति को सजा सुनाई है।
  • अदालत के आदेश के बाद पूर्व मंत्री और उनके पति को जेल भेज दिया गया है।

Manju Verma Arms Act Case: बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले की एक अदालत ने आठ साल पुराने शस्त्र अधिनियम मामले में राज्य की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर को शनिवार को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एमपी-एमएलए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। दंपति के बेटे अभिषेक आनंद चेरिया बरियारपुर सीट से जनता दल (यूनाइटेड) की विधायक हैं। पहले मंजू वर्मा इस सीट से विधायक थीं। सांसद/विधायक अदालत के विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने दंपति को सजा सुनाई।

पूर्व मंत्री और उनके पति को भेजा गया जेल

अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने बताया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के घेरे में आए वर्मा और उनके पति को अदालत के आदेश के अनुसार जेल भेज दिया गया। (Manju Verma Arms Act Case) मंजू वर्मा को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की करीबी माना जाता था। इस मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से चंद्रशेखर के करीबी संबंध होने के आरोप लगने के बाद वर्मा को समाज कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

क्या है पूरा मामला?

Manju Verma Arms Act Case: जांच के दौरान सीबीआई की एक टीम ने बेगूसराय के एक गांव में स्थित दंपति के घर पर छापेमारी की थी और बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। यादव के अनुसार, सुनवाई के दौरान सात गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें सीबीआई के धनबाद के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) भी शामिल थे।

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