‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में तेजी ला रही है बिहार सरकार

Ads

‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में तेजी ला रही है बिहार सरकार

  •  
  • Publish Date - September 2, 2026 / 05:13 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 05:13 PM IST

पटना, दो सितंबर (भाषा) बिहार सरकार ने केंद्र के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण का काम तेज कर दिया है। एक मंत्री ने बुधवार को यह जानकारी दी।

इस देशव्यापी मिशन का उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों को डिजिटल बनाना और उन्हें संरक्षित करना है।

बिहार में सरकार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके पुस्तकालय, संग्रहालय और निजी संग्रह में मौजूद ताड़ के पत्तों और कागज की दुर्लभ पांडुलिपियों को रिकॉर्ड करने और उन्हें सुरक्षित रखने पर ध्यान दे रही है।

बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों को बताया, “पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए, इस साल की शुरुआत में 6.23 करोड़ रुपये के खर्च को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। राज्य के 38 जिलों में बड़े पैमाने पर किए गए सर्वे के बाद आठ लाख से ज्यादा पांडुलिपियों की पहचान की गई है।”

विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि इस मिशन में कई चरण शामिल हैं, जिनमें पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और मेटाडेटा तैयार करना शामिल है।

उन्होंने कहा, “पांडुलिपियों की पहचान करने के लिए उन्हें संस्थागत संग्रहालयों और निजी संग्रहों में ढूंढा जाता है। पहचान के बाद, उन्हें डिजिटल रूप में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। फटे-पुराने, नाजुक या खराब हो रहे पन्नों को ठीक किया जा रहा है। उन्हें स्कैन भी किया जा रहा है और अपलोड किया जाएगा, ताकि भारत और विदेशों में लोग इस पूरे संग्रह को देख सकें।”

सचिव ने कहा कि ब्राह्मी और कैथी जैसी लिपियों को हिंदी और अंग्रेजी में बदलने (लिप्यंतरण करने) के साथ-साथ टेक्स्ट का संक्षिप्त सार तैयार करने के लिए भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का परिसर खोला जाएगा, जिससे बिहार के कलाकारों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार खत्म होगा।

सचिव ने कहा कि पटना के 20-25 किलोमीटर के दायरे में परिसर खोलने की योजना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन यह “जमीन की उपलब्धता और अन्य जरूरतों” पर निर्भर करेगा।

चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि सेवाओं और जानकारी तक पहुंच सुगम बनाने और बिहार को “फिल्म उद्योग के बीच लोकप्रिय” बनाने के लिए एक खास फिल्म पोर्टल बनाया गया है।

विभाग के एक बयान के अनुसार, अब तक 862 फिल्म कलाकार, 148 निर्माताओं और 29 सेवा प्रदाता इस पोर्टल पर पंजीकरण कर चुके हैं।

चंद्रवंशी ने कहा, “बिहार फिल्म संवर्धन नीति को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। हमने 59 से ज्यादा परियोजनाओं के लिए शूटिंग की मंज़ूरी दी है, जिनमें 46 फीचर फिल्में, दो वेब सीरीज और 11 वृत्तचित्र परियोजनाएं शामिल हैं।”

मंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना’ के तहत 411 कलाकारों की पहचान की गई है; इस योजना के तहत पात्र कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाते हैं।

इसके अलावा, बिहार में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिभाशाली युवाओं और चुनिंदा संस्थानों को क्रमश: छात्रवृत्ति और अनुदान दिया जा रहा है।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश