पटना, 19 फरवरी (भाषा) बिहार सरकार ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह आगामी महीनों में शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4 ) के तहत राज्य के सरकारी विद्यालयों में 45,000 और शिक्षकों की नियुक्ति करेगी।
इसके अलावा, सरकार राज्य संचालित दिव्यांग विद्यार्थियों के विद्यालयों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की भी नियुक्ति करेगी।
बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग के 60,204.60 करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट पर चर्चा के समापन के दौरान विधानसभा में यह घोषणा की।
सदन ने विभाग के बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया, हालांकि विपक्ष के सभी सदस्य सरकार के जवाब से असंतुष्टी जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
मंत्री ने कहा, “सरकार ने आगामी महीनों में टीआरई-4 के माध्यम से 45,000 और शिक्षकों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। टीआरई-1 और टीआरई-2 में क्रमशः 1.70 लाख से अधिक और 70,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई, जबकि टीआरई-3 में 66,603 पदों को भरा गया।’’
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से टीआरई के तहत 2.58 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है।
मंत्री ने बताया कि इसके अतिरिक्त स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त 3.68 लाख गैर-आयोग शिक्षकों का नियमितीकरण भी किया गया है।
बीपीएससी राज्य के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए परीक्षा आयोजित करता है।
मंत्री ने कहा, “सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। मॉडल स्कूलों के निर्माण के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पुराने शिक्षण संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।’’
चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि राज्य की राजग सरकार सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधारभूत संरचना में सुधार करने में विफल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं में सुधार के लिए आवंटित धन का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है।
भाषा कैलाश शफीक
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