India US Trade Deal:
नई दिल्ली। India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार तनाव के बाद अब आंकड़े नई कहानी बयां कर रहे हैं। दरअसल, 2 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि भारत-अमेरिका एक व्यापार समझौते पर राजी हो गए हैं। इसके बाद भारत पर लगा 25% रेसिप्रोकल टैरिफ भी घटाकर 18% कर दिया गया था। सके बाद अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगातार यह दावा किया जाता रहा कि भारत रूसी तेल आयात कम कर रहा है। दूसरी ओर रूस का कहना था कि भारत खरीद बंद नहीं करेगा। अब जारी हुए ताजा व्यापार आंकड़ों से संकेत मिल रहा है कि भारत ने वास्तव में रूस से आयात में बड़ी कटौती की है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में रूस से भारत के कुल माल (मर्चेंडाइज) आयात में 40।5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले जहां भारत रूस से 4।81 अरब डॉलर का माल आयात करता था, वहीं अब यह घटकर 2।86 अरब डॉलर रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में की गई कमी है। गौरतलब है कि रूस से भारत के कुल माल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत रही है। ऐसे में तेल खरीद में कमी का सीधा असर कुल आयात आंकड़ों पर पड़ा है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के सूत्रों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत की कुल तेल खरीद में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा 2022 के अंत के बाद सबसे कम हो गया है। जनवरी में ही मध्य-पूर्व के देशों से तेल की खरीद 2022 के बाद से सबसे अधिक हो गई। और इसी के साथ ही सऊदी अरब एक बार फिर से भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ था। युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए जिसमें उसके तेल पर प्रतिबंध भी शामिल था। प्रतिबंधों को देखते हुए रूस ने भारत और चीन जैसे अपने एशियाई सहयोगियों को रियायती दरों पर तेल ऑफर किया। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया और रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।