बिहार: अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए अलग निर्वाचक मंडल की वकालत की जीतन राम मांझी ने

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बिहार: अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए अलग निर्वाचक मंडल की वकालत की जीतन राम मांझी ने

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 10:16 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

पटना, छह जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने सोमवार को देश में अनुसूचित जातियों (एससी) की स्थिति पर चिंता जताते हुए एससी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए अलग निर्वाचक मंडल की वकालत की, जहां केवल इन समुदायों के मतदाता ही मतदान कर सकें।

मांझी ने कहा कि आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनुसूचित जातियों में साक्षरता दर महज 32 प्रतिशत है और उनकी सामाजिक स्थिति संतोषजनक नहीं है।

यहां अपनी पार्टी की राज्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यदि 1932 के पूना समझौते के समय डॉ. भीमराव आंबेडकर की राय मानी गई होती और एससी-एसटी के लिए अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था लागू होती, जहां केवल इन समुदायों के लोग मतदान करते, तो आज स्थिति पूरी तरह अलग होती।’’

उन्होंने दावा किया कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में सभी वर्गों को मतदान का अधिकार होने के कारण प्रभावशाली जातियों के मतदाता निर्वाचित प्रतिनिधियों पर प्रभाव डालते हैं।

मांझी ने कहा, ‘‘आरक्षित सीटों पर हमारे लोग वोट तो देते हैं, लेकिन जब आजीविका की बात आती है तो खेतों में काम करने और मजदूरी करने के लिए वही रह जाते हैं। सारा लाभ प्रभावशाली लोग उठा लेते हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि पूना समझौते से पहले महात्मा गांधी के आमरण अनशन के कारण डॉ. आंबेडकर को अपनी मांग से पीछे हटना पड़ा।

उन्होंने कहा कि उस समय महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर के बीच एससी-एसटी के लिए अलग निर्वाचक मंडल को लेकर वैचारिक मतभेद था, जिसका अंत पूना समझौते के रूप में हुआ।

माझी ने कहा कि इस समझौते के तहत अलग निर्वाचक मंडल के बजाय आरक्षित सीटों पर सभी मतदाताओं को मतदान का अधिकार देने की व्यवस्था स्वीकार की गई।

माझी ने कहा, ‘‘मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन उस समय के बड़े नेताओं ने डॉ. आंबेडकर से कहा था कि यदि ‘वृद्ध व्यक्ति’ की मृत्यु हो गई तो पूरे देश में दलितों को जला दिया जाएगा। डॉ. आंबेडकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि समझौते पर हस्ताक्षर करते समय उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे। वही आंसू आज हमारे लिए जहर बन गए हैं।’’

उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल के एक प्रमुख दलित नेता का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग पर्याप्त काम किए बिना खुद को ‘‘आरक्षण का सबसे बड़ा रक्षक’’ बताना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग कहते हैं कि जब तक वे जीवित हैं, आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। केवल नाखून काटकर शहीद बनने की कोशिश की जा रही है। मेरा मानना है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, तब तक कोई भी आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। कुछ लोग अपने प्रभाव का दावा करते हैं। आप कौन होते हैं ऐसा दावा करने वाले?’’

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान अपनी चुनावी सभाओं में अक्सर कहते रहे हैं कि जब तक वह जीवित हैं, कोई भी आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकता।

मांझी ने बिहार सरकार में मंत्री अपने पुत्र संतोष कुमार सुमन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘संतोष, तुम्हें भी बोलना चाहिए। चुप रहने से कुछ नहीं मिलेगा। जो दिखता है, वही बिकता है। सार्वजनिक जीवन में मुखर रहने वाले लोग राजनीतिक लाभ हासिल कर लेते हैं। उन्होंने गलत धारणा बनाकर ज्यादा सीटें हासिल कर लीं और तुम्हें क्या मिला? सिर्फ छह सीटें।’’

उनका इशारा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजग में हुए सीट बंटवारे की ओर था, जिसमें लोजपा (रामविलास) को 243 में से 29 सीटें मिली थीं, जबकि हम (सेक्युलर) को छह सीटें दी गई थीं।

मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं की मंशा जनता की सेवा करने की है, लेकिन यह तभी संभव है जब उन्हें राजनीति और समाज में बेहतर स्थान मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी कुछ लोगों की आंखों की किरकिरी बन गए हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब सम्राट चौधरी पुलिस कार्रवाई करते हैं तो कुछ लोग बेचैन हो जाते हैं। हमारी पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह हर कदम पर मुख्यमंत्री का समर्थन करे।’’

उल्लेखनीय है कि हाल में चिराग पासवान भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भारत तिवारी के परिजनों से मिले थे और पुलिस कार्रवाई की खुलकर आलोचना की थी।

दूसरी ओर, मांझी ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे ‘‘आत्मरक्षा’’ में उठाया गया कदम बताया।

उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगा।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना तीन अगस्त, 2026 को होगी।

मांझी ने कहा, ‘‘केंद्र में नरेन्द्र मोदी और बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकारों ने कल्पना से भी बेहतर काम किया है। बांकीपुर में राजग के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार बुरी तरह पराजित होगा।’’

अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में मांझी ने कहा कि इसमें शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘दान चोरी में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और उन्हें कोई राहत नहीं मिलेगी। नरेन्द्र मोदी को इसका श्रेय जाता है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लाखों लोगों को रोजगार मिला। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।’’

भाषा कैलाश

राजकुमार

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