उच्च न्यायालय ने वकीलों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी दिशानिर्देश की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा

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उच्च न्यायालय ने वकीलों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी दिशानिर्देश की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 10:02 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 10:02 PM IST

लखनऊ, छह जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सोमवार को उच्च न्यायालय में राज्य के वकीलों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी दिशानिर्देशों की मांग करने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

इससे पहले, महाधिवक्ता अजय मिश्रा ने राज्य के वकीलों की वर्तमान कार्यप्रणाली का बचाव किया, लेकिन यह भी माना कि अगर अदालत से कोई बेहतर सुझाव आता है तो राज्य सरकार उस पर विचार करने के लिए तैयार है।

मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार सिर्फ एक ग्राहक की तरह है और इसलिए वह अपनी पसंद के वकील चुनने के लिए स्वतंत्र है।

मिश्रा ने तर्क दिया,‘‘उच्च न्यायालय में राज्य के वकीलों की नियुक्ति के लिए मार्गदर्शन करने के लिए लीगल रिमेंबरेंसर (एलआर) मैनुअल है और इसके अलावा तीन सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति है, जिसमें महाधिवक्ता होने के नाते, वह स्वयं अध्यक्ष हैं।’’

महाधिवक्ता ने कहा, ‘‘ समिति बार-बार वकीलों को राज्य के वकील के रूप में नियुक्त करने के लिए उनके नामों की जांच और सुझाव देती है। इसलिए 2017 के बाद से राज्य के वकीलों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं हुई है। 2017 से पहले भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी।’’

उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए, मिश्रा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने भी माना कि अपनी पसंद और पदनाम के वकीलों को नियुक्त करना राज्य का विशेषाधिकार है।

मिश्रा ने कहा, ‘जनहित याचिका का कोई आधार नहीं है और ये खारिज किए जाने योग्य हैं।

भाषा सं जफर राजकुमार

राजकुमार