पटना, 28 सितंबर (भाषा) बिहार विधान परिषद के सभापति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बीच सत्ता साझेदारी की व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है।
विधान परिषद सचिवालय के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि जून 2024 में सभापति नियुक्त किए गए सिंह ने परिषद परिसर पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा।
उन्होंने जदयू के वरिष्ठ नेता देवेश चंद्र ठाकुर का स्थान लिया था, जिन्होंने सीतामढ़ी से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद सभापति पद से इस्तीफा दे दिया था।
अवधेश नारायण सिंह को जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। इसी वर्ष नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर भाजपा नेता सम्राट चौधरी के लिए रास्ता बनाया था।
गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कई बार विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रहे अवधेश नारायण सिंह पहली बार वर्ष 2012 में सभापति बने थे और 2017 तक इस पद पर रहे। वह 2020 में दोबारा सभापति बने, लेकिन 2022 में जदयू के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। इसके बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने सभापति का पद संभाला था।
राजग सूत्रों के अनुसार, भाजपा और जदयू के बीच यह समझ बनी हुई है कि दोनों दलों के नेताओं को एक-एक सदन की अध्यक्षता दी जाएगी।
ऐसी चर्चा है कि विधानसभा में भाजपा के आठवीं बार विधायक बने प्रेम कुमार पहले से ही अध्यक्ष हैं। ऐसे में अब गठबंधन विधान परिषद के उपसभापति और जदयू नेता राम को उच्च सदन के सभापति पद के लिए समर्थन दे सकता है।
भाषा
कैलाश रवि कांत