पटना, 28 सितंबर (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर पटना में बिहार लोक भवन तक विरोध मार्च निकाला।
सीपीआई की बिहार इकाई के अनुसार, यह प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (एआईवाईएफ), बिहार महिला समाज, बिहार राज्य किसान सभा, भारतीय खेत मजदूर यूनियन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) और तंजीम-ए-इंसाफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा।
पार्टी के बयान के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और वक्फ संशोधन अधिनियम को वापस लेने की मांग की।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश भी की। हालांकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
ज्ञापन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को 200 दिनों के गारंटीशुदा रोजगार और न्यूनतम मजदूरी के साथ बहाल करने, कृषि मजदूरों के लिए व्यापक केंद्रीय कानून बनाने, शहीद-ए-आजम भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम लागू करने, चारों श्रम संहिताएं वापस लेने तथा सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने सी2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी, एग्रीकल्चरल इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के तहत फसल बीमा योजना लागू करने, कृषि ऋण माफी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने की भी मांग की।
इस बीच, बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के छात्रों ने भी शैक्षणिक सत्र में देरी और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में शामिल हुए निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, “सम्राट चौधरी को छात्रों की बात सुननी चाहिए। यहां शैक्षणिक सत्र में देरी हो रही है, परीक्षा शुल्क अधिक लिया जा रहा है और बड़ी संख्या में छात्रों को अनुत्तीर्ण किया जा रहा है।”
भाषा कैलाश
मनीषा नरेश
नरेश