इंदिरा, राजीव और अटल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बिहार के ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया का निधन

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इंदिरा, राजीव और अटल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बिहार के 'धरती पकड़' नागरमल बाजोरिया का निधन

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  • Publish Date - September 4, 2026 / 06:30 PM IST,
    Updated On - September 4, 2026 / 06:30 PM IST

पटना/भागलपुर, चार सितंबर (भाषा) बिहार के कारोबारी नागरमल बाजोरिया (जो नगर निकाय चुनावों से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक सैकड़ों बार चुनाव मैदान में उतरने के कारण देशभर में ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर हुए) का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

परिजनों के अनुसार, भागलपुर निवासी बाजोरिया ने पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को क्रमशः रायबरेली और अमेठी में चुनौती देने का दावा किया था। लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को पटना के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान) के मूल निवासी बाजोरिया विभाजन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा के बीच लाखों शरणार्थियों के साथ अपना घर छोड़कर भारत आए थे। बाद में उन्होंने पूर्वी बिहार के भागलपुर में अपना ठिकाना बनाया, जो उस समय वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध था।

स्वर्गीय बाजोरिया के पुत्र सौरभ ने बताया कि उनके पिता ने 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सत्ता से बाहर हुआ। उन्होंने कहा, ‘वे ऐसे कपड़े पहनकर प्रचार करते थे, जिन पर उनके सिद्धांतों वाले नारे छपे रहते थे। उनकी कलाई में एक पुरानी घड़ी रहती थी, जिसके बारे में वे गर्व से कहते थे कि वह महात्मा गांधी के दौर की है।’

उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं था कि मेरे पिता को हमेशा हार ही मिली। उन्होंने 1960 में एक नगर निकाय चुनाव जीता था। हालांकि, 1969 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद उन्हें देशभर में पहचान मिली। वह चुनाव वी. वी. गिरि ने जीता था।’

गांधी परिवार के अलावा बाजोरिया ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़ा।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने याद करते हुए बताया कि बाजोरिया कई बार गधों के गले से प्रसिद्ध नेताओं के नाम वाली तख्तियां लटकाकर प्रचार करते थे। वे अपने अभियान में रुचि दिखाने वाले लोगों के बीच मुट्ठी भर काजू और किशमिश भी बांटते थे।

बढ़ती उम्र के कारण उनका सार्वजनिक जीवन सीमित हो गया। उनकी अंतिम चर्चित राजनीतिक पहल 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करना थी।

सौरभ ने कहा, ‘वे 2024 का लोकसभा चुनाव एक से अधिक सीटों, विशेषकर पटना साहिब और रायबरेली से लड़ना चाहते थे, लेकिन खराब स्वास्थ्य इसकी राह में बाधा बन गया।’

भाषा कैलाश संतोष

संतोष