निर्वाचन आयोग की पक्षपातपूर्ण भूमिका से भाजपा को अनुचित लाभ मिला : प्रशांत किशोर
निर्वाचन आयोग की पक्षपातपूर्ण भूमिका से भाजपा को अनुचित लाभ मिला : प्रशांत किशोर
मुजफ्फरपुर, 25 सितंबर (भाषा) बिहार के बांकीपुर से विधायक और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग (ईसी) पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी कार्यशैली से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अनुचित लाभ मिला है।
किशोर हाल में मीडिया में आई खबर के बारे में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग में कथित मतभेद का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा, “मैं पहला व्यक्ति था जिसने यह मुद्दा उठाया था कि निर्वाचन आयोग के पक्षपातपूर्ण रवैये का अनुचित लाभ भाजपा को मिल रहा है। मैंने 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ही यह बात कही थी।”
राजनीतिक प्रचार संस्था आईपैक में काम करते समय तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान का नेतृत्व कर चुके किशोर ने दावा किया, “मैंने स्पष्ट कहा था कि भाजपा 77 सीट जीत सकती है क्योंकि उसे निर्वाचन आयोग का संरक्षण प्राप्त है। यदि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होते तो उसकी सीट 50 से अधिक नहीं होतीं। आयोग के पक्षपात के कारण भाजपा से कड़ी टक्कर देने वाले दल हार जाते हैं।”
किशोर ने आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भी यही स्थिति देखने को मिली। उन्होंने कहा, “यदि निर्वाचन आयोग प्रशासनिक मशीनरी के खुले दुरुपयोग और चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा द्वारा सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने की अनदेखी नहीं करता, तो मैं कम से कम 50,000 मतों के अंतर से जीतता।”
उन्होंने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता धनबल, नौकरशाही के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित छेड़छाड़ जैसे विभिन्न मुद्दों के कारण प्रभावित हो रही है।
किशोर ने यह आरोप भी लगाया कि “यह गिरावट केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में शुरू नहीं हुई। उनके एक पूर्ववर्ती सेवानिवृत्ति के बाद एक बैंक के अध्यक्ष बन गए, जबकि उनका बैंकिंग क्षेत्र से कोई विशेषज्ञता संबंधी अनुभव नहीं था। यह स्पष्ट रूप से एक हाथ से देने और दूसरे हाथ से लेने का मामला है।”
भाषा कैलाश
जोहेब
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