कांग्रेस ने बिहार के ‘पहले दलित मुख्यमंत्री’ भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की मांग की

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कांग्रेस ने बिहार के ‘पहले दलित मुख्यमंत्री’ भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की मांग की

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 07:23 PM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 07:23 PM IST

पटना, 20 सितंबर (भाषा) कांग्रेस की बिहार इकाई ने राज्य के ‘‘पहले दलित मुख्यमंत्री’’ भोला पासवान शास्त्री को भारत रत्न देने की रविवार को मांग की, जिनके मुख्यमंत्री के रूप में अंतिम कार्यकाल के दौरान मुंगेरी लाल आयोग का गठन किया गया था, जिसने संख्या की दृष्टि से प्रभावशाली पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सिफारिश की थी।

यह मांग बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रवींद्र पासवान ने संवाददाता सम्मेलन में उठायी।

पासवान ने कहा कि सोमवार को बीपीसीसी मुख्यालय सदाकत आश्रम में शास्त्री की जयंती समारोह में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और राज्यभर से करीब 5,000 प्रतिनिधि शामिल होंगे।

शास्त्री के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग करते हुए पासवान ने कहा कि वह तीन बार मुख्यमंत्री रहे, केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाला। उन्होंने कहा कि 1971-72 में मुख्यमंत्री के रूप में शास्त्री के अंतिम कार्यकाल के दौरान मुंगेरी लाल आयोग का गठन किया गया था।

आयोग ने 1977 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी और उस समय समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर बिहार के मुख्यमंत्री थे, जिन्हें 2024 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

कर्पूरी ठाकुर द्वारा आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने का अगड़ी जातियों के कुछ वर्गों ने विरोध किया था। इसे बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया। वर्ष 1990 के दशक के मंडल आंदोलन के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की राजनीतिक भूमिका और प्रभाव बढ़ा।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप