पटना, 16 जून (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि पटना में दो कोचिंग संस्थानों के बीच हुए विवाद की जांच बिहार पुलिस कर रही है और मामले के दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
शिक्षक फैसल खान (खान सर) के संस्थान में दो जून को कथित तौर पर एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों ने तोड़फोड़ की थी। इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
खान के प्रतिद्वंद्वी रोशन आनंद को तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें सोमवार को जमानत मिल गई, जबकि पटना की एक स्थानीय अदालत ने इससे पहले खान की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
इस बीच, आनंद की रिहाई से एक दिन पहले उनके भाई की नेपाल में कथित रूप से रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। जेल से बाहर आने के बाद आनंद ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की।
इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘‘पुलिस मामले की जांच कर रही है। दोषियों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। हम मामले की गहराई तक जाएंगे और वास्तविक दोषियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा। सरकार तभी सीबीआई जांच पर विचार करेगी, जब वह पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं होगी।’’
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि मामले की जांच जारी है और सच्चाई सामने आ जाएगी।
उन्होंने पटना में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह मुद्दा छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसकी जांच आवश्यक है और जारी है। उचित जांच के बाद इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।’
बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने इस घटना को ‘‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताते हुए कहा कि कोचिंग संस्थानों में असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों ने शिक्षा को व्यावसायिक कारोबार बना दिया है। वे मुनाफाखोरी की होड़ में लगे हुए हैं। इनके आचरण के कारण नकारात्मक माहौल पैदा हुआ है।’’
यादव ने तेजस्वी यादव से भी इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ विपक्षी नेता राजनीतिक अवसर तलाशने के लिए इसे संघर्ष का मैदान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने से बचना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।’’
भाषा कैलाश
मनीषा धीरज
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