चुनावी रणनीतिकार से विधायक बने प्रशांत किशोर, विधानसभा में जन सुराज का खोला खाता
चुनावी रणनीतिकार से विधायक बने प्रशांत किशोर, विधानसभा में जन सुराज का खोला खाता
(फोटो के साथ)
पटना, तीन अगस्त (भाषा) चुनावी रणनीतिकार के रूप में नरेन्द्र मोदी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं को जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गढ़ बांकीपुर में जीत दर्ज करके बिहार विधानसभा में अपनी पार्टी जन सुराज का खाता खोला।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में किशोर की जीत लगभग दो वर्षों के राजनीतिक अभियान का परिणाम है, जिसके तहत उन्होंने जन सुराज की शुरुआत की और फिर पूरे बिहार का व्यापक दौरा किया। हालांकि, पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुल पाया था।
किशोर लगातार यह कहते रहे हैं कि ऐसे देश में, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा आजीविका के लिए संघर्ष कर रहा है, एक विश्वसनीय विपक्ष के लिए हमेशा जगह रहेगी।
‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के संस्थापक किशोर का एक चर्चित कथन रहा है, ‘‘इस देश में विपक्ष नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीतिक दल कमजोर हैं।’’
चुनावी रणनीतिकार के रूप में उन्होंने मोदी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, नीतीश कुमार, वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी, उद्धव ठाकरे और एम. के. स्टालिन जैसे विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं के लिए काम किया है।
उम्र उनके पक्ष में है और बिहार में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है। ऐसे में जन सुराज पार्टी के लिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर मौजूद है।
हालांकि, जन सुराज पहला राजनीतिक संगठन नहीं है, जिसमें किशोर ने नेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई हो। चुनावी प्रबंधन में उनकी दक्षता से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2015 में सत्ता में लौटने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए अपना सलाहकार नियुक्त किया था।
करीब तीन वर्ष बाद किशोर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए और शीघ्र ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिए गए। इससे अटकलें लगने लगी थीं कि नीतीश कुमार उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी मान रहे हैं।
लेकिन एक वर्ष से कुछ अधिक समय बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर नीतीश कुमार के रुख की सार्वजनिक आलोचना करने के कारण उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
पार्टी से निष्कासन के बाद किशोर ने ‘बात बिहार की’ अभियान शुरू करने की घोषणा की, लेकिन यह पहल अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।
वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की लगातार तीसरी चुनावी जीत के बाद किशोर ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पार्टी के पुनर्गठन का खाका भी रखा था, लेकिन यह योजना अमल में नहीं आ सकी।
उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथपत्र के अनुसार, किशोर के पास 22.19 करोड़ रुपये की चल और 73.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। उनकी पत्नी के पास 89.51 करोड़ रुपये की चल और 12.42 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है।
शपथपत्र के अनुसार, एक निजी कंपनी में उनकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसी कंपनी ने वर्ष 2024-25 में जन सुराज पार्टी को 85 करोड़ रुपये और जन सुराज फाउंडेशन को 50 लाख रुपये का चंदा दिया।
किशोर ने वर्ष 1991 में बक्सर के एम. पी. हाई स्कूल से दसवीं और वर्ष 1993 में पटना साइंस कॉलेज से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने वर्ष 1996 से 1999 के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यवसाय अध्ययन विभाग से ‘बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (बीबीए) की डिग्री प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2001 से 2003 के दौरान हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआई) में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) और हिंदूजा अस्पताल के सहयोग से संचालित विशेष स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यक्रम के तहत ‘मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन’ (एमएचए) की डिग्री हासिल की।
उन्होंने वर्ष 2010 में फ्रांस के क्लेरमों-फेरां विश्वविद्यालय से संबद्ध कैविलाम, विची में फ्रांसीसी भाषा का गहन पाठ्यक्रम भी पूरा किया।
भाजपा के तत्कालीन विधायक और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद बांकीपुर में उपचुनाव कराया गया।
भाजपा ने लगभग तीन दशक से इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के उद्देश्य से युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पार्टी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सकी।
भाषा कैलाश
जोहेब
जोहेब

Facebook


