पटना, 18 फरवरी (भाषा) बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इन पांच में से तीन सीटें सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास हैं और माना जा रहा है कि वह विपक्ष की शेष दो सीटों पर भी कब्जा करने की स्थिति में है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और मतदान 16 मार्च को होगा।
दो सीटें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पास हैं। दोनों मौजूदा सांसद – केंद्रीय मंत्री और ‘भारत रत्न’ कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह – लगातार दूसरे कार्यकाल में हैं।
गौरतलब है कि जदयू प्रमुख और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कुछ वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लगातार तीसरा कार्यकाल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था।
पार्टी ने उस समय यह तर्क दिया था कि लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए किसी को राज्यसभा नहीं भेजना उसकी नीति है। हालांकि इस बार अपवाद किया जाएगा या नहीं, इस पर पार्टी सूत्र भी चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि नीति का पालन करने पर दोनों मौजूदा सांसद अपने संवैधानिक पद खो देंगे।
राजग की तीसरी सीट उपेंद्र कुशवाहा के पास है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वह 2025 में भाजपा के समर्थन से उपचुनाव में राज्यसभा पहुंचे थे। यह उपचुनाव विवेक ठाकुर के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद हुआ था।
हालांकि, कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा अहम सहयोगी पार्टी है, जो कोइरी जैसे प्रभावशाली पिछड़े वर्ग के वोटों का दावा करती है, लेकिन राजग के सूत्र मानते हैं कि कुशवाहा को पर्याप्त राजनीतिक लाभ मिल चुका है, उनके पुत्र दीपक प्रकाश को विधायक या विधान परिषद सदस्य न होते हुए भी, राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल चुकी है।
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में दीपक प्रकाश की पार्टी के पास केवल चार विधायक हैं, जिनमें उनकी मां स्नेहलता भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें जदयू और भाजपा जैसे बड़े सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा।
बाकी दो सीटें प्रमुख विपक्षी दल राजद के पास हैं, जिसके पास अब केवल 25 विधायक रह गए हैं, जो राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल से काफी कम है।
राजद के एक राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता हैं जो लालू प्रसाद के करीबी हैं। गुप्ता लगातार पांचवें कार्यकाल में हैं। दूसरी सीट पर पटना के कारोबारी अमरेंद्र धारी सिंह हैं, जिनकी भूमिहार जैसे ऊंची जाति के मतदाताओं में मजबूत पकड़ मानी जाती है।
राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 40 वोटों की जरूरत होगी। पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में राजग को 202 सीटें मिली थीं, जबकि राजद, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को कुल मिलाकर 35 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था।
हालांकि, राज्यसभा की जिन पांच सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से फिलहाल कोई भी भाजपा के पास नहीं है, जबकि 89 विधायकों के साथ वह विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है।
अटकलें हैं कि भाजपा के उम्मीदवारों में एक नाम नितिन नवीन का हो सकता है, जिन्हें पिछले महीने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
नवीन ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद दिसंबर में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन वह अभी भी बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों को देखते हुए वह अपनी सीट छोड़ सकते हैं।
राजग में एक और दावेदार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) हो सकती है, जिसके प्रमुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हैं। पार्टी ने पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जिनमें से दो विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
चिराग पासवान अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि राजग के बड़े सहयोगी उनके राजनीतिक महत्व को देखते हुए उन्हें समायोजित करेंगे। चिराग का मानना है कि राजग में उनकी मौजूदगी से दुसाध समुदाय के वोट मिलते हैं, जो दलितों में प्रभावशाली माने जाते हैं।
इस बीच, राजग सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से भी असंतोष की आवाज उठ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, मांझी का मानना है कि उनकी पार्टी को उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है। हालांकि, मांझी के पुत्र संतोष, जो भाजपा के समर्थन से विधान परिषद सदस्य बने थे, राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री हैं।
पार्टी का दावा है कि उसे मुसहर समुदाय का समर्थन प्राप्त है, जो दलितों में सबसे वंचित माने जाते हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास विधानसभा में पांच विधायक हैं, जिनमें संतोष की पत्नी और सास भी शामिल हैं।
भाषा कैलाश शफीक
शफीक