गिरिराज ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कर्मयोगी
गिरिराज ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कर्मयोगी
(फोटो के साथ)
पटना, 19 सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि कर्मयोगी के नेतृत्व में ‘‘लाखों’’ लोगों को रोजगार मिला और गरीबी में रहने वाले लोगों का हिस्सा घटकर ‘‘करीब तीन प्रतिशत’’ रह गया है।
कपड़ा मंत्री सिंह, डिजिटल माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार मेले के नवीनतम संस्करण में शामिल होने के बाद पटना में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
बेगूसराय से भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘‘कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम उस स्थिति तक पहुंच गए हैं, जहां ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के करीब 35 करोड़ सदस्य हैं। जो लोग बेरोजगारी को लेकर शिकायत करते हैं, उन्हें खुद इन आंकड़ों को देखना चाहिए।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘मोदी के नेतृत्व में हम उस दौर से आगे बढ़ चुके हैं, जब सरकारी नौकरियों को ही रोजगार का एकमात्र स्रोत माना जाता था। आज करीब 2.5 लाख स्टार्टअप हैं, जो लाखों युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। पहले सत्ता में रही कांग्रेस ऐसी क्रांति लाने में विफल रही।’’
सिंह ने कहा कि मोदी के सत्ता संभालने के बाद से करोड़ों लोगों को गरीबी के चक्र से बाहर निकाला गया है और गरीबी में रहने वाले लोगों का हिस्सा 21 प्रतिशत से घटकर करीब तीन प्रतिशत रह गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की बढ़ती ताकत को इस बात से भी देखा जा सकता है कि जब भी आईफोन का कोई नया मॉडल लॉन्च होता है तो मोबाइल फोन की दुकानों के बाहर खरीदारों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके विपरीत, पड़ोसी पाकिस्तान में लोग भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी से जूझ रहे हैं। हमारे देश में कारों और मोटरसाइकिलों की खरीद में भी कई गुना वृद्धि हुई है।’’
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा, जो परीक्षा पत्र लीक के मुद्दे पर युवाओं को एकजुट करने के लिए देशभर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब वह क्या कर रहे थे? मोदी लोगों से सहज रूप से जुड़ते हैं, जबकि उनके उलट राहुल गांधी लिखे हुए भाषण को पढ़ते हैं। वह अब नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन जब उन्हें कुछ करने का मौका मिला तो उन्होंने समय बर्बाद किया और संसद के भीतर विधेयक फाड़ दिए।’’
सिंह का इशारा 2013 की एक घटना की ओर था, जब गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में अध्यादेश का मसौदा फाड़ दिया था।
भाषा आशीष माधव
माधव

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