पटना, 16 जुलाई (भाषा) बिहार सरकार भोजपुरी के महान नाटककार, लोकगायक और समाज सुधारक भिखारी ठाकुर की लोकनाट्य परंपरा के संरक्षण, अध्ययन और शिक्षण के लिए सारण जिले में एक समर्पित विश्वविद्यालय खोलने पर विचार कर रही है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सारण के कुतुबपुर (दियारा) गांव में 18 दिसंबर 1887 को जन्मे भिखारी ठाकुर को भोजपुरी भाषा के महानतम रचनाकारों में शुमार किया जाता है।
बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “भिखारी ठाकुर एक महान नाटककार, गीतकार, अभिनेता, लोकनर्तक, लोकगायक और समाज सुधारक थे। उन्होंने एक योद्धा की तरह जीवन जिया और समाज की कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया। लोककला के माध्यम से उन्होंने आम जन की भाषा में सामाजिक मुद्दों को उठाया।”
कुमार ने कहा, “हम सारण जिले में एक समर्पित विश्वविद्यालय खोलने की योजना बना रहे हैं, जहां भिखारी ठाकुर की ओर से शुरू की गई लोकनाट्य की विभिन्न विधाओं का संरक्षण, अध्ययन और शिक्षण किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी को लोकनाट्य, साहित्य और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भिखारी ठाकुर के योगदान से अवगत कराया जाना चाहिए।
कुमार ने बताया कि इस संबंध में विभाग एक व्यापक प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है, जिसे सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
भोजपुरी गायक एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य मनोज तिवारी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर के ‘गंगा स्नान’, ‘बिदेसिया’, ‘गबरघिचोर’, ‘बेटी बेचवा’, ‘भाई विरोध’, ‘पिया निसइल’ और ‘नयी बहार’ जैसे नाटक आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा, “भिखारी ठाकुर भारत के महानतम लोक कलाकारों में से एक थे। वह अपने समय से काफी आगे की सोच रखने वाले कलाकार थे। उन्होंने अपनी खुद की नाट्य मंडली बनाई और ‘बिदेसिया’ जैसे विश्वप्रसिद्ध तथा प्रवासन की पीड़ा पर आधारित कालजयी नाटक सहित कई महत्वपूर्ण नाटकों की रचना की।”
भाषा
कैलाश पारुल
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