लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य करीब एक साल बाद बिहार लौटीं
लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य करीब एक साल बाद बिहार लौटीं
पटना, एक अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य बृहस्पतिवार को करीब एक साल बाद बिहार लौटीं।
रोहिणी आचार्य ने करीब एक साल पहले आरोप लगाया था कि उनके छोटे भाई और पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने उन्हें माता-पिता के घर से चले जाने पर मजबूर किया था।
सिंगापुर में अपने पति और बच्चों के साथ रहने वाली आचार्य का हवाई अड्डे पर उनके पिता लालू प्रसाद, मां राबड़ी देवी और बड़ी बहन मीसा भारती ने स्वागत किया।
परिवार ने इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करने से परहेज किया। आचार्य को सीधे कौटिल्य नगर ले जाया गया, जहां उनके माता-पिता अपने निजी आवास में रह रहे हैं। राबड़ी देवी मुख्यमंत्री आवास के समीप स्थित सरकारी बंगला खाली करने के बाद से इस निजी आवास में रह रही हैं।
पत्रकारों ने जब कार में बैठ रहीं 47 वर्षीय आचार्य से सवाल करने की कोशिश की तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, ‘‘कृपया मेरी यात्रा को कोई राजनीतिक महत्व न दें। मैं अपने पिता के आग्रह पर अपने माता-पिता के साथ रहने आई हूं।’’
आचार्य ने कुछ साल पहले अपने पिता को अपनी एक किडनी दान की थी। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव सारण से लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सारण सीट का प्रतिनिधित्व लालू प्रसाद ने 2013 में चारा घोटाला मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित किए जाने तक किया था।
पिछले साल आचार्य ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार अभियान में काफी सक्रियता दिखाई थी। चुनाव में राजद 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में केवल 25 सीटें जीत सका। इसके बाद आचार्य ने पार्टी में ‘‘जवाबदेही’’ तय किए जाने पर जोर दिया। बताया जाता है कि इसके बाद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे तेजस्वी यादव के साथ उनके मतभेद बढ़ गए।
इसके बाद आचार्य ने पत्रकारों के सामने और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके छोटे भाई और उनके करीबी सहयोगियों की मौजूदगी में उन पर चप्पल फेंकी गई और उन पर लालू प्रसाद को दान की गई किडनी के बदले करोड़ों रुपये मांगने का आरोप लगाया गया।
आचार्य ने तब कहा था कि वह ‘‘राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने के दौरान उनके माता-पिता असहाय होकर देखते रहे।
यह पूरा घटनाक्रम 10, सर्कुलर रोड स्थित उस सरकारी बंगले में हुआ था, जो 2005 में राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उन्हें आवंटित किया गया था। यह बंगला वर्षों तक राजद के कैंप कार्यालय के रूप में भी इस्तेमाल होता रहा। अब यह बंगला भाजपा के एक मंत्री को आवंटित किया जा चुका है। राबड़ी देवी ने विधान परिषद में विपक्ष की नेता के तौर पर उन्हें आवंटित दूसरे सरकारी बंगले में जाने से इनकार कर दिया है।
तेजस्वी यादव अब अपने माता-पिता से अलग रहते हैं। वह विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे हैं। इस बीच उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ और मजबूत की है और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं।
हालांकि भाई-बहन के बीच अभी सुलह नहीं हुई है, लेकिन लालू प्रसाद और राबड़ी देवी अपनी बेटी के संपर्क में बने हुए हैं। वे इस साल की शुरुआत में सिंगापुर भी गए थे और आचार्य के घर पर कुछ दिन रहे थे।
भाषा कैलाश सिम्मी
सिम्मी
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