मुजफ्फरपुर, 26 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को देशवासियों से आह्वान किया कि वे संविधान में निहित कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करके भारत को विश्व का अग्रणी गणराज्य बनाएं।
वह 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आरएसएस के मुजफ्फरपुर संभागीय कार्यालय ‘मधुकर निकेतन’ में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।
भागवत ने कहा, “संविधान ही हमें धर्म सिखाता है। इसका नियमित अध्ययन नागरिकों को उनके कर्तव्यों के प्रति सजग रखता है और कानून का पालन करना अपने आप में एक प्राथमिक नागरिक कर्तव्य है।”
उन्होंने “मानवता व सामाजिक समरसता को बनाए रखने” पर आधारित भारतीय संस्कृति में निहित कई “अलिखित मानदंडों” का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों के बलिदानों से भारत को स्वतंत्रता मिली। भारत को एक गणराज्य के रूप में संरक्षित और सुदृढ़ करना नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को सार्वजनिक जीवन में निरंतर आदर्श आचरण दिखाना होगा।
भागवत ने तिरंगे के महत्व को समझाते हुए कहा कि केसरिया रंग त्याग, गतिशीलता और भारत की प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है, सफेद रंग विचारों की पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है और हरा रंग प्रगति, समृद्धि तथा निरंतर विकास का द्योतक है।
उन्होंने कहा कि मध्य में स्थित अशोक चक्र यह दर्शाता है कि समस्त प्रगति धर्म द्वारा निर्देशित होनी चाहिए।
इस अवसर पर कई आरएसएस पदाधिकारी उपस्थित थे।
भाषा कैलाश जोहेब
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