पटना, सात जनवरी (भाषा) बिहार के वित्त सह योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत राज्य के विधानमंडल सदस्यों ने पिछले पांच से छह साल में 72,206 योजनाओं पर 3,633 करोड़ रुपए खर्च।
उन्होंने बताया कि सदस्यों ने 5,088 करोड़ रुपए की विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की अनुशंसा की थी।
मंत्री ने सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रति विधानमंडल सदस्य की अनुशंसा राशि तीन करोड़ रुपए से बढ़ाकर चार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि 17वीं विधानसभा एवं विधान परिषद के सदस्यों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की अनुशंसा की है। मंत्री ने राज्य की विकास दर के बारे में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वार्षिक वृद्धि दर 13.09 प्रतिशत रही जबकि वर्तमान में प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 76,490 रुपये रहा। यादव ने कहा कि राज्य के विकास से जुड़े आंकड़ों का संग्रह किया जा रहा है और सभी विभागों से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को संग्रहित कर योजना एवं विकास विभाग तथा बिहार सांख्यिकी निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल पर नियमित रूप से अद्यतन किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत 18वीं लोकसभा के सांसदों की अनुशंसा पर नवंबर 2025 तक स्वीकृत 2,456 योजनाओं में से 1,108 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जिन पर 117.64 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इसी तरह 17वीं लोकसभा के अंतर्गत सांसदों की अनुशंसा पर स्वीकृत 13,093 योजनाओं में से 12,190 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जिन पर 621.90 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं।
यादव ने कहा कि राज्यसभा सदस्यों की अनुशंसा पर वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक स्वीकृत 3,792 योजनाओं में से 2,914 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिन पर 261.95 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जबकि 868 योजनाएं प्रगति पर हैं।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत दो अक्टूबर 2016 से 31 दिसंबर 2025 तक 12वीं या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण 8,76,473 आवेदकों को भत्ता दिया गया, जिस पर 1,267 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
यादव ने बताया कि लोक वित्त समिति के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 में 586 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी लागत 1,38,811 करोड़ रुपए है।
वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 357 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी लागत 1,68,870 करोड़ रुपए है।
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