बिहार में 2024 की तुलना में 2025 में हत्या, बलात्कार, डकैती और दंगा मामलों में कमी आयी: डीजीपी

बिहार में 2024 की तुलना में 2025 में हत्या, बलात्कार, डकैती और दंगा मामलों में कमी आयी: डीजीपी

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 07:52 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 07:52 PM IST

(तस्वीर के साथ)

पटना, नौ जनवरी (भाषा) बिहार में 2024 की तुलना में 2025 में हत्या, बलात्कार, डकैती और दंगों जैसे गंभीर आपराधिक मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने न केवल अपराध पर प्रभावी नियंत्रण किया, बल्कि राज्य में चुनाव का सफलतापूर्वक संचालन भी सुनिश्चित किया।

उन्होंने कहा, “प्रमुख अपराधों का तुलनात्मक विश्लेषण करने पर सामने आया है कि 2024 की तुलना में 2025 में हत्या के मामलों में 8.3 प्रतिशत, बलात्कार में 8.2 प्रतिशत, डकैती में 26.9 प्रतिशत और दंगों के मामलों में 21.5 प्रतिशत की कमी आई है। यह पुलिस की त्वरित कार्रवाई का परिणाम है।”

डीजीपी ने कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में यह गिरावट महत्वपूर्ण है।

डीजीपी के अनुसार, 2025 में हत्या के 2556 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 2786 थी। बलात्कार के मामले 2024 के 2205 से घटकर 2025 में 2025 रह गए। इसी तरह डकैती के मामले 2024 के 238 से घटकर 2025 में 174 और दंगों के मामले 2024 के 3186 से घटकर 2025 में 2502 रह गए।

कुमार ने बताया कि 2025 में पुलिस की सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई के कारण गंभीर आपराधिक मामलों में 3,61,364 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई, जो 2024 की तुलना में करीब 50 हजार अधिक है।

डीजीपी के अनुसार इस दौरान पुलिस ने 4963 अवैध हथियार और 30,133 कारतूस बरामद किए तथा राज्य में संचालित 74 ‘मिनी गन’ फैक्टरियों का भंडाफोड़ किया।

भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिसकर्मियों को कड़ी चेतावनी देते हुए डीजीपी ने कहा, “वर्दी पहनकर अपराधियों जैसा व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारे पास 13 हजार उपनिरीक्षक हैं और उनमें से कुछेक लोग यदि अवैध रूप से पैसा, सोना या अन्य रिश्वत लेते हैं तो हम इसे सहन नहीं करेंगे। ऐसे कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा और सेवा से बर्खास्त भी किया जाएगा।”

भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर डीजीपी ने कहा कि “भूमि विवाद सुलझाने में पुलिस की भूमिका नगण्य है।”

उन्होंने बताया कि कुल आपराधिक मामलों में 50-60 प्रतिशत भूमि विवाद से जुड़े होते हैं, अब प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में भूमि संबंधी शिकायतों की सुनवाई के लिए बैठक होगी, जिसमें थानाध्यक्ष भी मौजूद रहेंगे।

डीजीपी ने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में राज्य में नक्सल हिंसा की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है और नक्सली गिरोह कमजोर पड़ रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक के मुताबिक 2025 में 134 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 2024 में 44 नक्सली पकड़े गए थे। वर्ष 2025 में छह नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया। इस दौरान नक्सलियों से 70 नियमित हथियार और 15,552 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

कुमार ने कहा कि बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य में एक अलग साइबर अपराध नियंत्रण इकाई की स्थापना की गई है, जिसका नेतृत्व आईजी/एडीजी रैंक का अधिकारी करेगा। डीजीपी

पुलिस महानिदेशक के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक एनसीआरपी हेल्पलाइन पोर्टल 1930 पर 27.96 लाख साइबर संबंधित शिकायतें मिली।विभिन्न साइबर थानों में दर्ज 6319 मामलों में 1050 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

डीजीपी ने बताया कि जनवरी 2025 से नवंबर 2025 के बीच कुल 1,43,545 आरोपियों को सजा सुनाई गई जिनमें चार दोषियों को फांसी, 1097 को आजीवन कारावास, 560 को 10 वर्ष से अधिक, 1410 को 10 वर्ष से कम, 2491 को दो वर्ष से कम की सजा सुनायी गयी, जबकि 1,37,983 दोषियों पर जुर्माना या बॉन्ड भरा गया।

उन्होंने बताया कि बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के 423 मामलों में 518 दोषियों को सजा सुनाई गई।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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