राजग अति पिछड़ा वर्ग को साध रहा, ‘संकल्प पत्र’ में इसके लिए कई घोषणाएं

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राजग अति पिछड़ा वर्ग को साध रहा, ‘संकल्प पत्र’ में इसके लिए कई घोषणाएं

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  • Publish Date - October 31, 2025 / 02:41 PM IST,
    Updated On - October 31, 2025 / 02:41 PM IST

पटना, 31 अक्टूबर (भाषा) बिहार की सियासत एक बार फिर अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है, यही वजह है कि अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने भी इस वर्ग को साधने की रणनीति के तहत शुक्रवार को जारी अपने ‘संकल्प पत्र’ में ईबीसी के आर्थिक उत्थान, शिक्षा, आरक्षण और सम्मान पर विशेष जोर दिया है।

विधानसभा चुनाव से पहले राजद, कांग्रेस और वामदलों वाले महागठबंधन ने अति पिछड़ा वर्ग को अपने समर्थन में करने के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया था।

करीब 36 फीसदी आबादी वाला यह वर्ग बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिना ईबीसी के समर्थन के किसी भी दल के लिए सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं है।

राजग ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि अति पिछड़ा वर्ग के युवाओं को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आयोग गठित किया जाएगा, जो इस वर्ग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर सरकार को सिफारिशें सौंपेगा तथा यह भी तय करेगा कि किस प्रकार ईबीसी समुदाय को मुख्यधारा में लाकर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाए।

महागठबंधन ने पहले ही ईबीसी के लिए अलग घोषणा पत्र जारी कर इस वर्ग में सेंध लगाने की कोशिश की है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने निषाद समाज से आने वाले मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर यह संदेश दिया कि महागठबंधन अब केवल यादव-मुस्लिम समीकरण पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अति पिछड़ों को जोड़ने का नया सामाजिक समीकरण तैयार करेगा।

महागठबंधन ने अपने घोषणा पत्र में 30 प्रतिशत आरक्षण, पांच डिसमिल (भूमि माप की इकाई) जमीन, निजी स्कूलों और सरकारी ठेकों में ईबीसी आरक्षण जैसी घोषणाएं की हैं।

वहीं, राजग ने जवाबी रणनीति के तहत आर्थिक सहायता, आयोग गठन और ‘कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि’ जैसी योजनाओं की घोषणा की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की सत्ता की असली चाबी अब इसी वर्ग के पास है। पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार इसी ‘ईबीसी फैक्टर’ के बल पर सत्ता में बने हुए हैं, लेकिन इस बार महागठबंधन ने ईबीसी को अपने पक्ष में करने की जोरदार कोशिश शुरू कर दी है।

भाषा कैलाश

मनीषा खारी

खारी